लखनऊ - प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि बिना सही जनगणना किए महिलाओं के लिए आरक्षण का फैसला करना न्यायसंगत नहीं होगा। अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार जो महिलाओं को गिनने से बच रही है, वह उन्हें आरक्षण देने का दावा कैसे कर सकती है।
सदन में विशेष बैठक
सरकार ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद की विशेष बैठक बुलाई है। इस दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा की संभावना है। बिल के उद्देश्य और इसके अमल के तरीकों पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद दिखाई दे रहे हैं।
महिला आरक्षण का आधार ही निराधार है
अखिलेश यादव ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि, “जब गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा। अगर किसी काम को करने की सही मंशा होती है, तो शंका नहीं होती।” उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल का आधार निराधार है। उनका कहना है कि अगर कुल सीटों का एक तिहाई हिस्सा महिलाओं को आरक्षित करना है, तो यह गणित और आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए, न कि पुरानी या अधूरी जानकारी पर।
अखिलेश यादव ने आगे कहा, “2011 के पुराने आंकड़ों को आधार बनाकर जब महिलाओं की जनसंख्या का निर्धारण किया जाएगा, तो आरक्षण की आधारभूमि ही गलत होगी। जैसे भूमि में दोष हो तो सच्ची फसल कैसे उग सकती है, उसी तरह बिना सही गणना के आरक्षण का सही क्रियान्वयन नहीं हो सकता।”
पहले जनगणना, फिर आरक्षण
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने जोर देकर कहा कि सरकार को पहले देश की नई जनगणना करानी चाहिए, उसके बाद महिला आरक्षण पर बहस करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो सरकार महिलाओं की वास्तविक संख्या को गिनना नहीं चाहती, वह उनके लिए आरक्षण का दावा कैसे कर सकती है। अखिलेश यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि महिलाओं के साथ छलावा नहीं होने देंगे।
पीएम मोदी का बयान
अखिलेश यादव की टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान के बाद आई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिन बढ़ा दिया गया है ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 2023 में पारित कानून को 2029 से लागू किया जा सके।