हल्द्वानी के रानीबाग क्षेत्र में स्थित चित्रशिला धाम में विराजमान जिया माता का मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम माना जाता है। यह मंदिर न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि अपनी पौराणिक मान्यताओं और रहस्यमयी कथाओं के कारण भी विशेष पहचान रखता है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां जिया माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
देवी जिया माता के बाल सोने के समान चमकदार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद पुराण में भी जिया माता का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि देवी जिया माता के बाल सोने के समान चमकदार थे। एक कथा के अनुसार, जब देवी नहर में स्नान कर रही थीं, तभी उनके बाल नहर के बहाव में बहते हुए मुगलों तक पहुंच गए। इसके बाद मुगल सेना उनकी तलाश करते हुए नहर के किनारे-किनारे रानीबाग तक पहुंच गई। मान्यता है कि उसी स्थान पर आज भी एक पत्थर मौजूद है, जिस पर जिया माता के घाघरे के सूखने के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। इसी स्थान पर जिया माता ने संकट के समय भोलेनाथ का आह्वान किया, जिसके बाद एक गुफा प्रकट हुई और देवी ने वहां शरण ली।
कथाओं के अनुसार, इसके पश्चात जिया माता हरिद्वार की ओर प्रस्थान कर गईं और वहीं अदृश्य हो गईं। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया। हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व, यानी 13 जनवरी की रात को जिया माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कत्यूरी समाज के लोग और अन्य श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र होकर देवी जिया माता की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। आस्था, इतिहास और रहस्य से जुड़ा चित्रशिला धाम स्थित जिया माता मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और इसकी धार्मिक मान्यता समय के साथ और अधिक मजबूत होती जा रही है।
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