केंद्र सरकार द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण नीति-विचार सामने आया है। सरकार इस कानून को जनगणना और परिसीमन की अनिवार्य शर्त से अलग करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण अपेक्षाकृत जल्द लागू किया जा सकता है। इससे महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले लागू करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार सरकार की योजना यह भी हो सकती है कि इस व्यवस्था को वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों से पहले लागू किया जाए। इन दोनों राज्यों के चुनावों को देखते हुए महिला आरक्षण को लागू करने का समय राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि ऐसा निर्णय लिया जाता है तो यह देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नया आयाम दे सकता है।
आरक्षित सीटों के निर्धारण के लिए लॉटरी प्रणाली पर विचार
सरकारी स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि एक-तिहाई सीटों के चयन के लिए लॉटरी प्रणाली अपनाई जाए। इस व्यवस्था के तहत किसी भी निर्वाचन क्षेत्र को स्थायी रूप से आरक्षित करने के बजाय यादृच्छिक तरीके से सीटों का निर्धारण किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि विभिन्न क्षेत्रों को समय-समय पर महिला प्रतिनिधित्व का अवसर मिले और राजनीतिक संतुलन भी बना रहे।
राजनीतिक दलों से सहमति बनाने की कोशिश
इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विभिन्न दलों से बातचीत शुरू की है। उन्होंने विपक्ष के प्रमुख नेताओं से भी इस विषय पर राय मांगी है। सरकार का प्रयास है कि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था को लागू करने से पहले अधिकतम दलों की सहमति प्राप्त हो, ताकि इसका क्रियान्वयन सुचारु और विवाद रहित हो सके।
विपक्ष की मांग और राजनीतिक बहस
विपक्षी दलों का मत है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना इसके क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब पैदा करता है। कई दलों ने मांग की है कि इसे जल्द लागू किया जाए और आगामी लोकसभा चुनावों से पहले महिलाओं को इसका लाभ मिले। इस विषय पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में संसद के भीतर और बाहर इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
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