कोलकाता: आईएसएफ छोड़ने के बाद भांगड़ के नेता अराबुल इस्लाम के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि वह एक बार फिर अपने पुराने दल तृणमूल कांग्रेस का रुख कर सकते हैं। हालांकि, सवाल यह था कि उनकी वापसी किस खेमे में होगी।
कालीघाट या ऋतब्रत का खेमा?
अराबुल के तृणमूल में लौटने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में दो तरह की चर्चाएं थीं। एक ओर कालीघाट स्थित तृणमूल नेतृत्व का खेमा था, तो दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी का अलग राजनीतिक समूह। इसी वजह से उनकी अगली राजनीतिक दिशा को लेकर कुछ असमंजस बना हुआ था।
सोमवार के बाद काफी हद तक तस्वीर साफ
सोमवार के घटनाक्रम के बाद अराबुल इस्लाम की राजनीतिक दिशा को लेकर चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया। उन्हें ऋतब्रत बनर्जी के खेमे की ओर झुकते हुए देखा गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अराबुल इसी राजनीतिक धड़े के साथ अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं।
तृणमूल में दो धड़ों के बीच नई हलचल
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक तौर पर दो अलग-अलग धड़े नजर आ रहे हैं। कई विधायक और सांसद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पुराने खेमे से अलग होकर अपना अलग राजनीतिक समूह बना चुके हैं। इसी बदलते समीकरण के बीच अराबुल इस्लाम का ऋतब्रत बनर्जी के खेमे की ओर जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भांगड़ की राजनीति में क्या होगी भूमिका?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में अराबुल इस्लाम की भूमिका क्या होगी। भांगड़ की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे अराबुल के अनुभव और स्थानीय प्रभाव को देखते हुए आने वाले दिनों में उनके कदम पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी। यह भी देखना अहम होगा कि नए खेमे में उन्हें संगठनात्मक स्तर पर क्या जिम्मेदारी मिलती है।