कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। सोमवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने जिस तरह के न्याय की मांग की है, उन्हें वैसा ही न्याय मिलेगा। उन्होंने इस घटना को "अत्यंत जघन्य अपराध" बताते हुए दोषियों को मृत्युदंड दिलाने की बात कही।
परिवार की हर मांग पूरी करने का भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़िता के पिता ने जो भी मांगें रखी हैं, सरकार उन्हें पूरा करने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि पीड़ित परिवार ने सरकार पर भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री ने लोगों से भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा कि दोषियों को कानून के तहत सबसे कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
आईजी की निगरानी में SIT कर रही जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की जांच के लिए आईजी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। परिवार की शिकायत के आधार पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार इन लोगों का फरार आरोपियों से संपर्क था।
चार मामले दर्ज, मॉब लिंचिंग की भी होगी जांच
बारुईपुर मामले में कुल चार एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें एक मामला सामूहिक दुष्कर्म का है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि घटना के बाद हुई मॉब लिंचिंग में सांप्रदायिक रंग भी देखने को मिला। उन्होंने बताया कि हिंसा के दौरान सीआरपीएफ के दो जवान घायल हुए और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी गई। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बारुईपुर थाने की भूमिका पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, बारुईपुर थाने की कार्यप्रणाली से राज्य पुलिस के शीर्ष अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं। थाना प्रभारी (आईसी) समेत अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका और घटना की सूचना मिलने के बाद उठाए गए कदमों को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
लापरवाही साबित होने पर होगी कड़ी कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि शुरुआती जांच में पुलिस की लापरवाही के संकेत मिले हैं। यदि रिपोर्ट में किसी अधिकारी की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं सरकार का कहना है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों और लापरवाह अधिकारियों, दोनों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।