नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अब देश के अधिकांश हिस्सों में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आगामी दिनों में इसकी तीव्रता और बढ़ने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दस दिनों के दौरान उत्तर, पश्चिम, मध्य, पूर्व और तटीय भारत के अनेक क्षेत्रों में व्यापक वर्षा दर्ज की जाएगी। कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की स्थिति बन सकती है, जिससे नदियों के जलस्तर में वृद्धि, शहरी जलभराव तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका है। मौसम विभाग ने नागरिकों से लगातार मौसम संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
महाराष्ट्र में बारिश का सबसे अधिक प्रभाव, मुंबई में जनजीवन प्रभावित
मानसून का सबसे व्यापक प्रभाव इस समय महाराष्ट्र में दिखाई दे रहा है, जहां लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा ने सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मुंबई सहित अनेक शहरी क्षेत्रों के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे सड़क यातायात, सार्वजनिक परिवहन और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। एहतियात के तौर पर कई शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अत्यधिक वर्षा, तेज हवाओं और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की चेतावनी दी है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा मछुआरों को विशेष सतर्कता बरतने और समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ वर्षा के आसार
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए आगामी दिनों में गरज-चमक, बिजली गिरने, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना व्यक्त की है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा के कारण तापमान में गिरावट आएगी और उमस से राहत मिलेगी, हालांकि तेज हवाओं और अचानक होने वाली वर्षा के कारण यातायात तथा दैनिक गतिविधियां कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन ने नागरिकों से खुले स्थानों पर अनावश्यक रुकने से बचने तथा खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन ने बढ़ाई मुश्किलें, सड़क संपर्क हुआ प्रभावित
पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा ने एक बार फिर भूस्खलन की घटनाओं को बढ़ा दिया है। अनेक स्थानों पर पहाड़ियों से मलबा और चट्टानें गिरने के कारण दर्जनों सड़कें बंद हो गई हैं, जिन्हें खोलने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। कांगड़ा, कुल्लू, चंबा और शिमला सहित कई जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा के दौरान भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए यात्रियों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और राहत दलों को तैयार रखने में जुटा हुआ है।
कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
मौसम विभाग ने बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित अनेक राज्यों में भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दो सप्ताह तक पश्चिमी तट, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्वी क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने के संकेत हैं। लगातार वर्षा को देखते हुए राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन दलों को सक्रिय कर दिया है तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। जलाशयों, नदियों और तटीय इलाकों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
सतर्कता और समय पर जानकारी ही मानसून के जोखिम से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के सक्रिय चरण में नागरिकों की सतर्कता किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती है। भारी वर्षा के दौरान जलभराव वाले मार्गों से बचना, पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा न करना, नदी-नालों के समीप जाने से परहेज करना तथा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। किसानों, मछुआरों, पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच चरम मौसमीय घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है, इसलिए पूर्व तैयारी और समय पर प्राप्त सूचना ही जन-धन की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।