कोलकाता: कोलकाता की प्रतिष्ठित बेलियाघाटा 33 पल्ली दुर्गापूजा इस वर्ष गंभीर विवादों के बीच फंस गई है। पूजा शुरू होने में करीब तीन महीने का समय बाकी है, लेकिन अब तक न तो खुटी पूजा हो सकी है और न ही मंडप निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। समिति का कहना है कि मौजूदा हालात के कारण इस साल आयोजन पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
आयोजक पर हमले का आरोप, पुलिस में शिकायत
पूजा समिति के सामान्य सचिव सुषांत साहा ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानीय लोगों ने पूजा रोकने की धमकी देने के बाद उनके साथ मारपीट की। इस घटना में उनकी आंख में गंभीर चोट आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मामले को लेकर बेलियाघाटा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
'पूजा से कभी बाधित नहीं हुई आपातकालीन सेवाएं'
सुषांत साहा का कहना है कि पूजा सड़क पर आयोजित होती है, जिससे कुछ समय के लिए रास्ता संकरा जरूर हो जाता है, लेकिन एंबुलेंस या अन्य आपातकालीन सेवाओं के आवागमन में कभी कोई रुकावट नहीं आई। उनका दावा है कि कुछ लोग जानबूझकर पूजा के आयोजन में बाधा डाल रहे हैं, जिससे माहौल खराब हो रहा है।
विधायकों से लगाई मदद की गुहार
पूजा समिति ने पूरे मामले की जानकारी भाजपा विधायक सुजल घोष और तापस राय को दी है। समिति का कहना है कि दोनों जनप्रतिनिधियों ने सहयोग का भरोसा दिया है। इसके बावजूद आयोजकों की चिंता कम नहीं हुई है और वे प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
कलाकार भी असमंजस में
इस वर्ष मंडप निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाले कलाकार शिवशंकर पाल ने भी मौजूदा हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस पूजा के लिए अन्य कई प्रस्ताव ठुकरा दिए थे, लेकिन अब आयोजन पर संकट गहराने से उनकी पेशेवर योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
पूजा समिति का कहना है कि इस विवाद का समाधान प्रशासन के सक्रिय हस्तक्षेप से ही संभव है। आयोजकों को उम्मीद है कि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि कोलकाता की इस ऐतिहासिक दुर्गापूजा का आयोजन तय समय पर हो सके।