कोलकाता। पश्चिम बंगाल की आर्थिक स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि बंगाल आज ‘डेट ट्रैप’ की ओर बढ़ रहा है, जहां कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और औद्योगिक ढांचा कमजोर होता जा रहा है।
कर्ज का बढ़ता बोझ, खतरे के संकेत
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल का Debt-GSDP Ratio करीब 38% तक पहुंच गया है, जो रिजर्व बैंक के तय 25% के सुरक्षित स्तर से काफी अधिक है। इसकी तुलना में महाराष्ट्र (18%) और गुजरात (17%) कहीं बेहतर स्थिति में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के बाद राज्य की वित्तीय स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है।
बंगाल से उद्योगों का पलायन, महाराष्ट्र बना पहली पसंद
महाराष्ट्र तेजी से उद्योगों का केंद्र बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल से लगभग 1400 बड़ी इंडस्ट्रीज पलायन कर चुकी हैं, जिनमें 100 से अधिक लिस्टेड कंपनियां शामिल हैं।
हाल ही में दो बड़ी कंपनियों ने, जिनकी बंगाल में 50 वर्षों से मौजूदगी थी, महाराष्ट्र सरकार के साथ नए निवेश के लिए समझौते (MoU) किए हैं।
युवाओं के रोजगार पर संकट
बंगाल की करीब 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, लेकिन उद्योगों के बाहर जाने से रोजगार के अवसर तेजी से घट रहे हैं।
राज्य सरकार पर आरोप है कि विकास के बजाय प्रशासनिक ढांचे को चलाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिससे युवाओं का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है।
वेतन और विकास में पिछड़ता राज्य
जहां देश में 8वें वेतन आयोग पर चर्चा हो रही है, वहीं बंगाल में अभी भी 5वें और 6ठे वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। यह स्थिति राज्य की आर्थिक चुनौतियों और वित्तीय दबाव को साफ तौर पर दर्शाती है।
भ्रष्टाचार और घोटालों की छाया
राज्य में शारदा घोटाला, नारद घोटाला और कोयला घोटाले जैसे मामलों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। आरोप है कि प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आय का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।
फिस्कल डेफिसिट भी बढ़ा चिंता का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल का Fiscal Deficit 4.5% से 5% के बीच पहुंच चुका है, जो सुरक्षित माने जाने वाले 3% से काफी अधिक है। स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि सरकार को पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ रहा है।