कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा कमेटियों को एक-एक लाख रुपये का आर्थिक अनुदान देने की घोषणा के बाद सोमवार को विधाननगर में चेक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। साल्टलेक स्थित विधाननगर पूर्व थाना क्षेत्र की कुल 31 दुर्गा पूजा कमेटियों में से 24 कमेटियों ने राज्य सरकार का अनुदान स्वीकार किया, जबकि सात कमेटियों ने मुख्यमंत्री की अपील पर अनुदान लेने से इनकार कर दिया।
चेक वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए शमिक भट्टाचार्य और स्वास्थ्य मंत्री
विधाननगर पूर्व थाना क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य, विधाननगर के विधायक और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्वारद्वत मुखोपाध्याय तथा विधाननगर पुलिस के डिप्टी कमिश्नर मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पूजा कमेटियों के प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से अनुदान के चेक सौंपे गए।
'जिन्हें जरूरत है, वही अनुदान लें', मुख्यमंत्री की अपील का जिक्र
चेक वितरण से पहले अपने संबोधन में सांसद शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दुर्गा पूजा कमेटियों को एक लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री की अपील का जिक्र करते हुए कहा कि जिन पूजा कमेटियों को आर्थिक सहायता की जरूरत है, उन्हें ही यह अनुदान लेना चाहिए। इसी अपील के बाद कुछ कमेटियों ने अनुदान नहीं लेने का फैसला किया।
बंगाल में दुर्गा पूजा की संख्या बढ़ने का दावा
शमिक भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की संख्या एक हजार से अधिक बढ़ी है। उन्होंने दुर्गा पूजा को बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि इस पर्व का ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व है।
बांग्लादेश की स्थिति का जिक्र, धार्मिक परंपराओं पर जताई चिंता
बांग्लादेश का जिक्र करते हुए शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि सीमा पार रहने वाले उनके भाई-बहन ठीक से दुर्गा पूजा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने धार्मिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के संदर्भ में देश विभाजन के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यह इतिहास बताना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर इस पार आना पड़ा था।
देश विभाजन और बंगाल के इतिहास पर बोले शमिक भट्टाचार्य
सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि कई लोगों को अपनी धार्मिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के लिए पूर्वी बंगाल छोड़कर पश्चिम बंगाल आना पड़ा था। उन्होंने शंखा-सिंदूर और दुर्गा पूजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपने परिवारों के इतिहास से परिचित कराना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ दुर्गा पूजा हो और दूसरी तरफ पूजा स्थलों को तोड़ दिया जाए, ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी और मेघनाद साहा का भी किया उल्लेख
अपने भाषण में शमिक भट्टाचार्य ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और मेघनाद साहा के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने 20 जून 1947 को पश्चिम बंगाल के गठन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम और उस समय कांग्रेस विधायकों की भूमिका पर भी अपनी बात रखी।
राजनीतिक विभाजन से ऊपर उठने की अपील
सांसद ने अपने संबोधन में दीपु दास का जिक्र करते हुए पुलिस पर हमले से जुड़े प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विभाजन की राजनीति से ऊपर उठने की अपील की। उनके भाषण में दुर्गा पूजा, धार्मिक परंपराओं और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े कई मुद्दे शामिल रहे।
'यह जनता का पैसा है', अनुदान को लेकर शमिक भट्टाचार्य का बयान
पूजा कमेटियों को दिए जा रहे अनुदान पर बोलते हुए शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह पैसा किसी राजनीतिक दल या राज्य सरकार का निजी पैसा नहीं है। उनके मुताबिक, आम लोग अपनी मेहनत से जो धन सरकारी खजाने में जमा करते हैं, उसी का एक हिस्सा अनुदान के रूप में उन्हें वापस दिया जा रहा है। उन्होंने इस राशि को जनता का पैसा बताया।