कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। विपक्षी दल जहां SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे आम मतदाताओं के अधिकारों से जोड़ रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस राजनीतिक चुनौती का जवाब देने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी अब अवैध घुसपैठ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर विपक्ष के आरोपों का मुकाबला करने की तैयारी में है।
SIR के विरोध को घुसपैठियों के बचाव से जोड़ रही BJP
बीजेपी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि विपक्ष SIR के विरोध के जरिए अवैध घुसपैठियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को रोकने की कोशिश कर रहा है। पार्टी इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा, मतदाता सूची की शुद्धता और देश की नागरिकता से जोड़कर जनता के सामने रखने की तैयारी में है। बीजेपी का आरोप है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होती है।
'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' पर रहेगा जोर
बीजेपी ने अपने अभियान में 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' यानी पहचान करो, मतदाता सूची से नाम हटाओ और देश से बाहर भेजो की नीति को फिर से प्रमुखता देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले भी अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर चुके हैं। अब SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच पार्टी इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाना चाहती है।
बीजेपी ने 7 नवंबर को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर के साथ 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' का संदेश साझा किया। इसके जरिए पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया कि SIR को लेकर विपक्ष के विरोध के बावजूद वह अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर अपने रुख से पीछे हटने वाली नहीं है।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए सड़क पर उतरेगी BJP
SIR के खिलाफ विपक्षी दलों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच बीजेपी भी राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा रही है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ माहौल बनाने के साथ-साथ अवैध घुसपैठ के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि SIR के विरोध के पीछे घुसपैठियों के कथित वोट बैंक को बचाने की मंशा है।
बंगाल की राजनीति में SIR और घुसपैठ बने बड़े मुद्दे
पश्चिम बंगाल में SIR अब केवल मतदाता सूची के संशोधन तक सीमित नहीं रह गया है। यह बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने का खतरा है, वहीं बीजेपी का जोर अवैध घुसपैठियों की पहचान और उनके नाम हटाने पर है।
ऐसे में आने वाले दिनों में बीजेपी अपने राजनीतिक अभियान में घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठा सकती है। इससे बंगाल की राजनीति में SIR को लेकर जारी बहस और तेज होने के आसार हैं।