पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार दशकों पुराने ‘लैंड सीलिंग’ कानून को खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इस फैसले से राज्य में उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जमीन उपलब्ध हो सकेगी और बंगाल को एक बड़े औद्योगिक केंद्र में बदलने का रास्ता साफ होगा।
क्या है वेस्ट बंगाल लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1955?
राज्य में फिलहाल ‘वेस्ट बंगाल लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1955’ लागू है। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति या संस्था के पास कृषि और गैर-कृषि जमीन रखने की एक सीमा तय की गई है। सरकार का मानना है कि यही कानून बड़े उद्योगों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया है, क्योंकि कंपनियों को फैक्ट्री और टाउनशिप के लिए एकमुश्त जमीन नहीं मिल पाती।
औद्योगिक विकास में पीछे क्यों रह गया बंगाल?
भाजपा सरकार का आरोप है कि पिछली वामपंथी और टीएमसी सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण इस कानून में बदलाव नहीं किया। इसका असर यह हुआ कि राज्य औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में लगातार पीछे होता गया। सरकार का दावा है कि जब तक भूमि सीमा कानून में बदलाव नहीं होगा, तब तक Tata Group और Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनियां बंगाल में बड़े निवेश से बचती रहेंगी।
सरकार बना रही ‘लैंड बैंक’, आसान होगा निवेश
नबान्न में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में इस बात पर सहमति बनी है कि विकास के लिए पुराने नियमों में बदलाव जरूरी है। सूत्रों के अनुसार सरकार कानून की धारा 14Y में ढील देने पर विचार कर रही है। इससे टाउनशिप, लॉजिस्टिक हब और भारी उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण आसान हो जायेगा। सरकार एक बड़े ‘लैंड बैंक’ की भी तैयारी कर रही है, ताकि निवेशकों को तेजी से जमीन उपलब्ध कराई जा सके।
सिलीगुड़ी से दुर्गापुर तक खुलेगा विकास का रास्ता
सरकार की योजना के तहत सिलीगुड़ी, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे क्षेत्रों में नई औद्योगिक इकाइयों को बढ़ावा दिया जायेगा। आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक सेक्टर में बड़े निवेश की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि उद्योग आने से युवाओं को राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर मिलेंगे।
विपक्ष ने उठाये सवाल, सरकार ने दिया जवाब
इस प्रस्तावित फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने आशंका जतानी शुरू कर दी है। विपक्ष इसे किसानों के हितों के खिलाफ बता सकता है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों के अधिकारों की रक्षा की जायेगी और केवल उन्हीं जमीनों को औद्योगिक उपयोग के लिए खोला जायेगा, जो पहले से विकास के लिए चिन्हित हैं।
क्या बदल सकता है बंगाल का आर्थिक भविष्य?
राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह कानून वास्तव में खत्म या संशोधित होता है, तो यह पश्चिम बंगाल के औद्योगिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे राज्य में बड़े निवेश, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का नया दौर शुरू होने की संभावना है।