कोलकाता: पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को अहम आदेश दिया। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति अनुज सिंह की खंडपीठ ने OBC-A और OBC-B वर्गीकरण के तहत जारी प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत के आदेश का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्होंने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इन दोनों श्रेणियों के तहत OBC प्रमाणपत्र हासिल किए थे।
OBC-A और OBC-B व्यवस्था पर क्या कहा कोर्ट ने?
खंडपीठ के अनुसार, 2010 के बाद लागू की गई OBC-A और OBC-B की दोहरी व्यवस्था अब प्रभावी नहीं है। इसके चलते इस व्यवस्था के आधार पर जारी प्रमाणपत्रों की वैधता भी सवालों के घेरे में आ गई है। आदेश के मुताबिक, ऐसे प्रमाणपत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को आगामी सरकारी भर्ती और शैक्षणिक प्रवेश प्रक्रियाओं में अनारक्षित श्रेणी के तहत माना जा सकता है।
2010 के बाद शुरू हुआ था विवाद
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण की मौजूदा कानूनी लड़ाई की जड़ 2010 के बाद हुए बदलावों में है। तत्कालीन राज्य सरकार ने OBC समुदायों को दो हिस्सों में बांटते हुए OBC-A को 10 प्रतिशत और OBC-B को 7 प्रतिशत आरक्षण दिया था। इसके बाद आरक्षण सूची में शामिल समुदायों और उन्हें OBC दर्जा देने की प्रक्रिया को लेकर लगातार कानूनी आपत्तियां उठती रहीं।
2024 में हाई कोर्ट के फैसले से बढ़ा विवाद
मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2010 के बाद OBC सूची में शामिल किए गए 66 से अधिक समुदायों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने संबंधित प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इन समुदायों को दी गई OBC मान्यता को रद्द कर दिया था। इसके बाद मामले ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अदालत के निर्देशों के बाद राज्य सरकार की ओर से नए सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी अपनाई गई। हालांकि, बाद की कार्यवाही में सर्वेक्षण के तरीके और उसके आधार पर समुदायों को OBC सूची में शामिल करने को लेकर फिर सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 2,500 नमूनों के आधार पर 142 समुदायों को सूची में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई थी।
2026 में बदली आरक्षण नीति
मई 2026 में राज्य में नई सरकार के गठन के बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने 18 मई को अधिसूचना जारी की। इसके तहत 2010 से पहले की OBC व्यवस्था को बहाल करने की दिशा में कदम उठाया गया। नई व्यवस्था में 7 प्रतिशत OBC आरक्षण रखने और पहले से अधिसूचित 66 समुदायों को इसके दायरे में रखने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार ने इस मामले से जुड़ी अपनी कुछ लंबित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से वापस भी लीं।
विधानसभा में भी हुआ बदलाव
OBC व्यवस्था में बदलाव के लिए राज्य विधानसभा ने Backward Classes Act में संशोधन भी पारित किया। इसके तहत OBC की दोहरी A और B श्रेणी व्यवस्था को खत्म करने तथा आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया। इस व्यवस्था में 2010 से पहले आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध 66 समुदायों को ही 7 प्रतिशत आरक्षण के दायरे में रखने की बात कही गई है।
आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद पुराने OBC-A और OBC-B प्रमाणपत्र रखने वाले उम्मीदवारों की सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक प्रवेश में स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। संबंधित प्रक्रियाओं में अब यह तय करना होगा कि ऐसे उम्मीदवारों को किस श्रेणी में माना जाएगा और उनके पुराने प्रमाणपत्रों का क्या प्रभाव रहेगा। मामले का असर बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र धारकों पर पड़ सकता है, इसलिए अदालत के आदेश के व्यावहारिक अनुपालन और सरकार की ओर से जारी होने वाले अगले निर्देशों पर नजर रहेगी।