कोलकाता: दुर्गा पूजा के उत्सव के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस बार एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पूजा की छुट्टियों के दौरान भी अदालत पूरी तरह बंद नहीं रहेगी। जरूरी मामलों की सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वैकेशन बेंच और ड्यूटी पर तैनात न्यायाधीशों के माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था की गई है। हालांकि, इस फैसले के बाद अदालत के कामकाज, कर्मचारियों की छुट्टियों और निजी समय को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
पूजा की छुट्टियों में भी खुला रहेगा हाई कोर्ट
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे के निर्देश पर दुर्गा पूजा के दौरान अदालत में जरूरी मामलों की सुनवाई की व्यवस्था की गई है। महाषष्ठी से लेकर नवमी को छोड़कर पूजा के अन्य दिनों में अदालत में किसी न किसी न्यायाधीश की मौजूदगी रहेगी। शनिवार और रविवार को भी यह व्यवस्था लागू रहेगी।
इस दौरान तत्काल सुनवाई की जरूरत वाले मामलों के लिए याचिकाकर्ता ईमेल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। प्राप्त अनुरोधों पर विचार करने के बाद संबंधित न्यायाधीश मामले की सुनवाई का फैसला लेंगे।
वैकेशन बेंच की संख्या बढ़ने से चर्चा
पूजा की छुट्टियों में अदालत के लगातार काम करने और वैकेशन बेंच की व्यवस्था को लेकर कानूनी गलियारों में चर्चा हो रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत में लगभग 12 दिनों की छुट्टी निर्धारित थी। इस अवधि में 16 और 19 अक्टूबर को वैकेशन बेंच रखने की व्यवस्था की गई थी। बार एसोसिएशन की ओर से इन दोनों दिनों में बेंच नहीं रखने का अनुरोध किया गया था।
इस अनुरोध पर विचार किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन पूजा के दौरान जरूरी मामलों की सुनवाई जारी रखने का व्यापक फैसला बरकरार है।
अदालत के कर्मचारियों की छुट्टियों पर भी सवाल
इस व्यवस्था का एक दूसरा पहलू अदालत के कर्मचारियों से जुड़ा है। पूजा के दौरान लगातार कामकाज की व्यवस्था के कारण कोर्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहार के दिनों में भी ड्यूटी करनी पड़ सकती है। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों ने चिंता जताई है और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखे जाने की खबरें सामने आई हैं।
दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है। ऐसे में अदालत के कामकाज को जारी रखने की जरूरत और कर्मचारियों को त्योहार के दौरान परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देने के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जरूरी मामलों की सुनवाई बनाम निजी समय
पूजा के दौरान अदालत बंद रहने से कई बार जरूरी मामलों की सुनवाई टल जाती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हाई कोर्ट की नई व्यवस्था से तत्काल न्यायिक राहत की जरूरत वाले लोगों को फायदा मिल सकता है।
दूसरी ओर, लगातार कामकाज की व्यवस्था से न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और वकीलों के निजी समय तथा त्योहार की छुट्टियों को लेकर बहस भी तेज हो सकती है। अब सवाल यह है कि जरूरी मामलों की सुनवाई सुनिश्चित करते हुए अदालत से जुड़े लोगों के अवकाश और निजी जीवन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
फिलहाल, कलकत्ता हाई कोर्ट की यह व्यवस्था पूजा की छुट्टियों में न्यायिक कामकाज जारी रखने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।