पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में सड़क निर्माण परियोजना के दौरान मुख्य रास्ता काट दिए जाने से ग्रामीणों और निर्माण एजेंसी के बीच विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि खुदाई के दौरान आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे आसपास की बस्तियों का संपर्क प्रभावित हुआ। इससे नाराज स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवा दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, रास्ता बंद होने से स्कूली बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और रोजाना काम के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और ब्लॉक प्रशासन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश की। इसके बाद वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने के आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त होने की जानकारी सामने आई।
वैकल्पिक रास्ता नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में सड़क के निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान जेसीबी और अन्य भारी मशीनों से खुदाई की गई, जिससे गांव को जोड़ने वाला मुख्य रास्ता बाधित हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने यह भी आशंका जताई कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस और अन्य चारपहिया वाहनों को गांव तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई।
निर्माण स्थल पर ग्रामीणों ने रोका काम
रास्ता बाधित होने से नाराज ग्रामीण निर्माण स्थल पर एकत्रित हुए और एजेंसी के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सड़क निर्माण का काम इस तरह किया जाए कि स्थानीय लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद न हो। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना शुरू होने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाता, तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, खुदाई वाले हिस्से के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात में दिखाई देने वाले संकेतों की व्यवस्था जरूरी है, ताकि अंधेरे में किसी दुर्घटना की आशंका न रहे।
अधूरे निर्माण और सुरक्षा को लेकर भी चिंता
स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण की समयसीमा और काम पूरा होने को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों में विकास परियोजनाओं के दौरान यदि यातायात की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तो इसका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। दुर्गा पूजा और त्योहारी मौसम के दौरान बाजारों, अस्पतालों तथा अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने की आवश्यकता और बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रामीणों ने मांग की कि निर्माण कार्य के साथ-साथ आम लोगों की आवाजाही और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।
पुलिस और ब्लॉक प्रशासन ने संभाली स्थिति
विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और ब्लॉक प्रशासन के प्रतिनिधि निर्माण स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की। प्रशासन की ओर से आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की व्यवस्था पर सहमति बनने की जानकारी दी गई। ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि निर्माण कार्य के दौरान लोगों की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। हालांकि, वैकल्पिक रास्ते का निर्माण कब तक पूरा होगा और सड़क परियोजना की बाकी गतिविधियां किस समयसीमा में पूरी की जाएंगी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
विकास कार्यों के साथ जनसुविधा भी जरूरी
पुरुलिया की इस घटना ने ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के दौरान यातायात प्रबंधन और स्थानीय लोगों के साथ समन्वय की जरूरत को रेखांकित किया है। सड़क का निर्माण ग्रामीण संपर्क और विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन काम के दौरान मुख्य रास्ता बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था करना भी उतना ही जरूरी है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसी अपने आश्वासन पर कितनी जल्दी अमल करते हैं। वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने के बाद ही इलाके में आवागमन सामान्य होने की उम्मीद है।