कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आम जनता के मन में चल रही सबसे बड़ी आशंका को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दूर कर दिया है। सोमवार को कैबिनेट की पहली बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट घोषणा की कि राज्य में पहले से चल रही कोई भी सामाजिक परियोजना (Social Schemes) बंद नहीं की जाएगी।
पुरानी योजनाएं रहेंगी, पर 'फिल्टर' के साथ
मुख्यमंत्री ने कहा, "चाहे कोई योजना 30 साल पुरानी हो या 10 साल पुरानी, हम किसी को बंद नहीं करेंगे। हमने चुनाव प्रचार के दौरान भी यही वादा किया था।" हालांकि, मुख्यमंत्री ने इसके साथ दो अहम शर्तें भी जोड़ी हैं:
1. मृत व्यक्ति: अब मृत लोगों के नाम पर सरकारी योजनाओं का पैसा नहीं निकाला जा सकेगा।
2. अ-भारतीय (घुसपैठिए): मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो लोग भारतीय नागरिक नहीं हैं, उन्हें इन योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिलेगा। माना जा रहा है कि उनका इशारा सीधे तौर पर घुसपैठियों की ओर है।
DBT के जरिए होगा भुगतान
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नई सरकार अब मोदी सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मॉडल को लागू करेगी। पोर्टल्स को अपडेट किया जाएगा ताकि पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचे और बीच में कोई धांधली न हो सके।
केंद्रीय योजनाओं से जुड़ेगा बंगाल
कैबिनेट बैठक में यह भी तय हुआ कि अब बंगाल में 'आयुष्मान भारत' (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना), प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना, पीएम श्री, विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं को पूरी सक्रियता से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया है कि वे तुरंत सभी लंबित आवेदनों को केंद्रीय मंत्रालयों को भेजें।
कैबिनेट की पहली बैठक
नवान्न में हुई इस ऐतिहासिक बैठक में मुख्यमंत्री के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक मौजूद थे। हालांकि अभी तक मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है, लेकिन पहले दिन के फैसलों से नई सरकार की प्राथमिकताएं साफ हो गई हैं।