नई दिल्ली: देश में पारंपरिक दवा व्यवसाय पर गहराते संकट और ई-फार्मेसी (E-Pharmacy) की मनमानी के खिलाफ 'ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स' (AIOCD) ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन ने आगामी 20 मई, बुधवार को देशव्यापी 24 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल में देश के लगभग 12 लाख 40 हजार दवा दुकानदार शामिल होंगे, जिससे जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति ठप होने की आशंका है।
केमिस्टों की 3 प्रमुख मांगें:
1. ई-फार्मेसी पर पूर्ण प्रतिबंध: संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना फार्मासिस्ट और फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर दवाएं बेची जा रही हैं, जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।
2. दवाओं की कीमतों में अनिश्चितता: बड़ी कंपनियां मनमाने ढंग से दाम घटा-बढ़ा रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो रहा है और दवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
3. पुराने निर्देशों का दुरुपयोग: कोरोना काल (मार्च 2020) में घर-घर दवा पहुंचाने की जो छूट मिली थी, ई-फार्मेसी कंपनियां उसे ही आधार बनाकर अपना अवैध कारोबार फैला रही हैं।
"चावल-दाल नहीं है दवा"
AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल ने कड़े शब्दों में कहा कि दवाओं की तुलना चावल, दाल या आटे से नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी के नाम पर लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। भारी डिस्काउंट के लालच में बाजार में नकली दवाओं का चलन बढ़ रहा है और मरीजों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) पैदा हो रही है।
बंटा हुआ है व्यापारिक वर्ग?
हड़ताल को लेकर दवा विक्रेताओं में भी मतभेद दिख रहे हैं। 'ऑल इंडिया केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन' के महासचिव जयदीप सरकार ने कहा है कि वे ई-फार्मेसी के विरोधी तो हैं, लेकिन इस हड़ताल का समर्थन नहीं करते क्योंकि इससे आम जनता को भारी परेशानी होगी।
प्रशासन की भूमिका और जनता को सलाह
संगठन ने हर जिले के जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपने का निर्देश दिया है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट रूपरेखा तैयार नहीं की गई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि मरीज और उनके परिजन 20 मई की हड़ताल को देखते हुए जरूरी दवाओं का स्टॉक पहले से ही सुरक्षित कर लें, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।