कोलकाता: के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं, निरंकुशता और मंदिर की संपत्तियों के रखरखाव में गंभीर कमियों का आरोप लगाते हुए सावर्णा रॉयचौधरी परिवार ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सावर्णा रॉयचौधरी परिवार परिषद के सचिव देबर्षि रॉयचौधरी ने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को एक औपचारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में मंदिर के ट्रस्ट और प्रबंधन में व्यापक स्तर पर जारी धांधली की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने या फिर हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई को लिखे पत्र में उठाई गईं प्रमुख मांगें
मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र में सावर्णा रॉयचौधरी परिवार ने कालीघाट मंदिर की नई संचालन समिति के गठन की मांग की है। पत्र के अनुसार, नई समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत किया जाना चाहिए, जिसमें जिला जज, केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधि, सावर्णा परिवार के दो सदस्य और समाज के प्रतिष्ठित नागरिक शामिल हों। इसके साथ ही मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने से मंदिर की पवित्रता और गरिमा को पहुंच रहे नुकसान पर भी रोक लगाने की अपील की गई है।
1980 से बैंक वॉल्ट की चाबी गायब, गहनों की स्थिति अज्ञात
कालीघाट मंदिर की मां दक्षिणकाली के बहुमूल्य आभूषणों और संपत्तियों को लेकर चिंता जताते हुए पत्र में बताया गया है कि मंदिर के गहने एक राष्ट्रीयकृत बैंक के वॉल्ट में रखे हुए हैं। हालांकि, वर्ष 1980 से उस वॉल्ट की चाबी गायब है। पिछले 40 से अधिक वर्षों से चाबी न मिलने के कारण वॉल्ट के भीतर रखे गहनों की वर्तमान स्थिति क्या है और वे सुरक्षित हैं या नहीं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
2014 के बाद से नहीं हुआ प्रबंधन समिति का चुनाव
पत्र में आरोप लगाया गया है कि मंदिर की संपत्तियों और आभूषणों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार समिति का कार्यकाल काफी पहले समाप्त हो चुका है। नियम के अनुसार जिला जज की अध्यक्षता वाली इस समिति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, जिसमें 5 सेवायत और 6 बाहरी सदस्य शामिल होते हैं। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद से कालीघाट मंदिर संचालन समिति का चुनाव नहीं कराया गया है, जिससे मंदिर के आभूषणों और अन्य संपत्तियों के नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
जिला अदालत से प्रतिक्रिया न मिलने पर लिया सुप्रीम कोर्ट का रुख
सावर्णा रॉयचौधरी परिवार परिषद के सचिव देबर्षि रॉयचौधरी ने कहा कि उन्होंने इस मामले को चरणबद्ध तरीके से उठाया है। सबसे पहले दक्षिण 24 परगना के जिला जज के समक्ष याचिका दायर कर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और वॉल्ट में मौजूद आभूषणों की सूची जारी करने की मांग की गई थी। जिला जज की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने के बाद परिवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस कदम से भी समाधान नहीं निकला, तो वे जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे।
2006 में भी कोलकाता हाई कोर्ट पहुंचा था चढ़ावे में गड़बड़ी का मामला
कालीघाट मंदिर की संपत्ति और चढ़ावे में हेरफेर का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2006 में भी दान और चढ़ावे की पूरी राशि निर्धारित खाते में जमा न होने का मामला कोलकाता उच्च न्यायालय पहुंचा था। उस समय तत्कालीन चेयरमैन और जिला जज ने व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। लगभग दो दशक बाद अब एक बार फिर मंदिर की संपत्तियों और गहनों का मुद्दा कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।