कोलकाता: क्या कामारहाटी नगर पालिका (Kamarhati Municipality) पर वाकई भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा हो गया है? जब राज्य की राजनीति में बीजेपी की प्रदेश महासचिव लॉकेट चटर्जी के भाई सुशांत चटर्जी के चेयरमैन बनने को लेकर जोरदार चर्चाएं चल रही हैं, ठीक उसी समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने एक बड़ा बयान देकर अपनी ही पार्टी के एक धड़े के उत्साह पर पानी फेर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया है कि पार्टी इस तरह की 'कब्जा करने' (दखलअंदाजी) की राजनीति को बिल्कुल बढ़ावा नहीं देगी।श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर मुरलीधर सेन लेन स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे शमीक भट्टाचार्य ने पार्टी के कुछ हालिया कदमों पर खुलकर नाराजगी व्यक्त की।
'यह नहीं होने दिया जाएगा', शमीक भट्टाचार्य की कड़ी चेतावनी
कामारहाटी नगर पालिका की 35 सीटों में से अधिकांश पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कब्जा था। हालांकि, हाल ही में राजनीतिक समीकरण बदल गए। पालिका अध्यक्ष गोपाल साहा के इस्तीफे और कुछ अन्य पार्षदों के हटने के बाद, पिछले शुक्रवार को 25 पार्षदों को लेकर एक बोर्ड बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से सुशांत चटर्जी को नया पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) चुन लिया गया।
सुशांत चटर्जी भले ही निर्दलीय पार्षद हैं, लेकिन वे बीजेपी नेता लॉकेट चटर्जी के भाई हैं। इसी पारिवारिक संबंध के चलते भगवा खेमे के एक हिस्से ने प्रचार करना शुरू कर दिया कि कामारहाटी में ‘कमल खिल गया’ है। इसी प्रचार पर तीखी आपत्ति जताते हुए शमीक भट्टाचार्य ने मंच से कहा: "कोई भी आएगा, खुद को कोलकाता कॉरपोरेशन, बरानगर, कामारहाटी या बिधाननगर कॉरपोरेशन का पार्षद घोषित कर देगा— और पार्टी चुपचाप इसे स्वीकार कर लेगी? यह बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा।"
शाम 4 बजे तक मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
पार्टी के इस तरह के ढुलमुल रवैए और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के 'अति-उत्साह' को प्रदेश नेतृत्व बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। कामारहाटी में किस आधार पर बीजेपी का बोर्ड बनने का प्रचार किया जा रहा है, इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
शमीक भट्टाचार्य ने निर्देश दिया है कि कामारहाटी और जिले के संबंधित नेता पूरे मामले की समीक्षा कर आज (सोमवार) शाम 4 बजे तक प्रदेश महासचिव (संगठन) अमिताभ चक्रवर्ती को अपनी रिपोर्ट सौंपें। कड़े तेवर अपनाते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा: "आखिर किस आधार पर आज कामारहाटी में यह प्रचार किया जा रहा है कि बीजेपी ने वहां म्यूनिसिपैलिटी बोर्ड का गठन किया है? किसके कहने पर यह हुआ? चाहे कोई नेता हो, कोई मंत्री हो या कोई विधायक— यहाँ किसी की मनमानी नहीं चलेगी।"
क्या है कामारहाटी का अंदरूनी समीकरण?
राज्य में राजनीतिक उठापटक और दलबदल का खेल नया नहीं है, लेकिन कामारहाटी का समीकरण थोड़ा पेचीदा है। 35 सदस्यों वाले इस नगरपालिका बोर्ड में तीन निर्दलीय पार्षद थे और बाकी सभी टीएमसी के थे। हालांकि, इसी बीच एक पार्षद का निधन हो गया और चार अन्य ने इस्तीफा दे दिया। शुक्रवार को हुई बैठक में दो और पार्षद अनुपस्थित रहे, जिसके बाद बचे हुए 25 पार्षदों ने मिलकर लॉकेट चटर्जी के भाई सुशांत चटर्जी को चेयरमैन चुन लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र में बीजेपी की जमीन मजबूत करने के लिए यह एक रणनीतिक चाल हो सकती है। लेकिन खुद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की इस अभूतपूर्व फटकार और तुरंत रिपोर्ट तलब करने से यह साफ हो गया है कि मुरलीधर सेन लेन (बीजेपी मुख्यालय) सुशांत चटर्जी के चेयरमैन बनने को पार्टी की सफलता के रूप में नहीं देख रहा है। उल्टा, इस मुद्दे ने पार्टी के भीतर असहजता और दरार पैदा कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शाम 4 बजे की डेडलाइन बीतने के बाद बीजेपी नेतृत्व इस पर क्या कदम उठाता है।