कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बीच अमडांगा से विधायक कासेम सिद्दीकी ने एक बार फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे का रुख किया है। कुछ समय पहले वह ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ दिखाई दिए थे। अब उन्होंने साफ कहा है कि उनका राजनीतिक भरोसा ममता बनर्जी के साथ ही है।
‘दीदी जहां, हम भी वहां’
ममता बनर्जी के खेमे में वापसी के बाद कासेम सिद्दीकी ने कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ थे और आगे भी उनके साथ ही रहेंगे। उनका कहना है कि उन्हें लगा था कि ममता बनर्जी भी बागी विधायकों के साथ हैं, इसी गलतफहमी में वह उस गुट में चले गए थे। बाद में उन्हें पता चला कि ममता बनर्जी वहां नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अमडांगा में उन्होंने ममता बनर्जी की तस्वीर और पोस्टर के साथ चुनाव प्रचार किया था। उनके मुताबिक जनता ने भी ममता बनर्जी के नाम और नेतृत्व पर भरोसा करके उन्हें वोट दिया है। इसलिए उनका रुख स्पष्ट है—‘दीदी जहां हैं, हम भी वहीं हैं।’
चिट्ठी पर हस्ताक्षर को लेकर भी उठाया सवाल
कासेम सिद्दीकी ने दावा किया कि ऋतब्रत बनर्जी ने उन्हें एक बैठक में बुलाया था और कहा था कि ममता बनर्जी ही नेतृत्व करेंगी। इसी भरोसे के बीच उनसे एक चिट्ठी पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में उन्हें समझ आया कि यह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला समूह नहीं था।
कासेम की वापसी के दौरान उनके साथ तृणमूल विधायक कुणाल घोष भी मौजूद रहे। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों से भ्रम और गलत जानकारी के आधार पर हस्ताक्षर करवाए गए थे।
ऋतब्रत गुट ने दावे को किया खारिज
दूसरी ओर, विपक्षी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कासेम सिद्दीकी के ‘वापसी’ के दावे पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि कासेम पहले भी कालीघाट खेमे में ही थे और उनके गुट में आए ही नहीं थे। उन्होंने कासेम पर अमडांगा के मतदाताओं से दूरी बनाने का आरोप भी लगाया।
इसी राजनीतिक खींचतान के बीच कुणाल घोष ने दोनों खेमों में मौजूद विधायकों की संख्या स्पष्ट करने के लिए गुप्त मतदान के जरिए फ्लोर टेस्ट की मांग भी रखी। ऋतब्रत बनर्जी ने फ्लोर टेस्ट की चुनौती स्वीकार करने की बात कही, लेकिन गुप्त फ्लोर टेस्ट के विचार पर सवाल उठाया।
2026 में ममता ने दिया था टिकट
कासेम सिद्दीकी अमडांगा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें अमडांगा से उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने चुनाव जीतकर विधानसभा में जगह बनाई।
कासेम सिद्दीकी फुरफुरा शरीफ से जुड़े पीरजादा परिवार से आते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 2024 से उन्हें ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में माना जाता रहा है। ऐसे में उनका बागी गुट से अलग होकर ममता के खेमे में लौटना तृणमूल के अंदर चल रही राजनीतिक उठापटक के लिहाज से अहम माना जा रहा है।