खड़गपुर: पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में एक स्कूली छात्र के सीने में गोली लगने की घटना की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती दौर में इसे पुराने आपराधिक गिरोहों के बीच संभावित गैंगवार से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन पुलिस की जांच में मामला अलग निकला। पुलिस के मुताबिक, छात्र अक्षय कुमार झा अपने दोस्त के घर पर मौजूद एक अवैध 9 एमएम पिस्तौल को देखने के दौरान गोली लगने से घायल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। पश्चिम मेदिनीपुर की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना ने स्पष्ट किया कि शुरुआती आशंकाओं के विपरीत, यह किसी विरोधी गिरोह की ओर से किया गया हमला नहीं था। पुलिस के अनुसार, हथियार को संभालने के दौरान दुर्घटनावश गोली चली थी। तलाशी के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पिस्तौल, कारतूस और खून से सने कपड़े भी बरामद किए गए। इस घटनाक्रम ने खड़गपुर में पुराने आपराधिक गिरोहों और अवैध हथियारों को लेकर चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। हालांकि, पुलिस के मुताबिक, फिलहाल इस मामले को गैंगवार मानने का आधार नहीं मिला है।
दोस्त के घर में चली गोली, जांच में बदली घटना की कहानी
पुलिस की जांच के अनुसार, अक्षय झा अपने दोस्त सागर कुमार के घर गया था। वहां एक 9 एमएम पिस्तौल मौजूद थी, जिसे कथित तौर पर सागर के पिता वेंकट प्रसाद राव ने रखा था। जांच में सामने आया कि हथियार को देखने और संभालने के दौरान गोली चल गई, जिससे अक्षय के सीने में गंभीर चोट आई। घटना के बाद घायल छात्र को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया। शुरुआती जानकारी में दावा किया गया था कि सड़क पर बाइक से जाते समय उस पर हमला हुआ है। लेकिन बाद में पुलिस ने जांच के आधार पर बताया कि गोली घर के भीतर चली थी। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद घबराहट में घायल छात्र को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि शुरुआती घटनाक्रम को लेकर अलग कहानी क्यों सामने आई थी।
पूर्व माफिया वेंकट प्रसाद राव के घर से अवैध पिस्तौल बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने सागर कुमार के घर की तलाशी ली। वहां से एक 9 एमएम पिस्तौल, तीन जिंदा कारतूस, दो खाली कारतूस के खोल और खून से सने कपड़े बरामद किए जाने की खबर है। पुलिस का कहना है कि बरामद हथियार बिना लाइसेंस का था। वेंकट प्रसाद राव खड़गपुर के पुराने आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा रहा था। उसकी हत्या के बाद भी कथित तौर पर हथियार घर में मौजूद था। मौजूदा मामले ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े अवैध हथियारों का पता लगाने और उन्हें जब्त करने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है। हालांकि, इस घटना के आधार पर पूरे शहर में पुराने गिरोहों के दोबारा सक्रिय होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस ने फिलहाल इसे दुर्घटनावश हुई गोलीबारी बताया है।
तीन युवक गिरफ्तार, हथियार रखने और साक्ष्य छिपाने के आरोपों की जांच
पुलिस ने मामले में सागर कुमार, कोला जोगेश्वर राव उर्फ चिंटू और विशाल जाना को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में अवैध हथियार रखने और घटना से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने के आरोप भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पिस्तौल कहां से आई थी, उसे घर में क्यों रखा गया था और घटना के बाद पूरे मामले की जानकारी देने में कोई तथ्य छिपाया गया था या नहीं। बरामद हथियार और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले को किसी गिरोह के बीच सीधे टकराव का नतीजा मानने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जानकारी के बजाय जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर ही घटना के कारणों का निर्धारण किया जाना चाहिए।
खड़गपुर के पुराने माफिया इतिहास की फिर चर्चा
रेलवे स्क्रैप, ठेकेदारी और स्थानीय कारोबार पर वर्चस्व को लेकर खड़गपुर में अतीत में आपराधिक गिरोहों के बीच संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। एक समय शहर में बासब रामबाबू और वेंकट प्रसाद राव जैसे नामों को लेकर आपराधिक गतिविधियों की चर्चा होती थी। पुराने संघर्षों ने शहर की कानून-व्यवस्था को लेकर लंबे समय तक चिंता पैदा की थी। अक्षय झा को गोली लगने की घटना के शुरुआती विवरण ने इसी पुराने दौर की यादें ताजा कर दी थीं। हालांकि, पुलिस की जांच ने फिलहाल गैंगवार की आशंका को खारिज किया है। इसलिए मौजूदा घटना और पुराने गिरोहों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का दावा करना उचित नहीं होगा। फिर भी, किसी आवास में अवैध पिस्तौल का मौजूद होना और उसके चलते एक छात्र का गंभीर रूप से घायल हो जाना अवैध हथियारों की समस्या की गंभीरता को रेखांकित करता है।
पुलिस का संदेश: अवैध हथियारों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी
पश्चिम मेदिनीपुर की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना ने कहा कि खड़गपुर में पुराने दौर की गैंगवार जैसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होने दी जाएगी। पुलिस ने अवैध हथियारों के खिलाफ कार्रवाई करने और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है। इस मामले में पुलिस की जांच के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं—एक, छात्र को गोली लगने की परिस्थितियों का पूरा खुलासा; और दूसरा, बिना लाइसेंस के हथियार के स्रोत तथा उसे घर में रखे जाने के पीछे की वजह का पता लगाना। अक्षय झा की गंभीर चोट ने इस घटना को केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रखा है। यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि घर में असुरक्षित तरीके से रखा गया अवैध हथियार भी जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा कि घटना के लिए किसकी क्या जिम्मेदारी तय होती है।