कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले प्रथम चरण के मतदान से पहले कोलकाता की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। चुनावी तैयारियों के तहत शहर की सड़कों पर चलने वाली निजी बसों का बड़ा हिस्सा मतदान ड्यूटी में लगाया गया है, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने सुरक्षा और चुनावी व्यवस्था के तहत लगभग 50 प्रतिशत निजी बसों को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इन बसों का उपयोग केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) और पुलिस जवानों की आवाजाही के लिए किया जा रहा है।
1600 से अधिक बसें चुनाव ड्यूटी में शामिल
बस यूनियनों के मुताबिक, कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में रोजाना करीब 3000 निजी बसें चलती हैं, लेकिन इनमें से लगभग 1600 बसों को चुनावी कार्यों के लिए अधिग्रहित किया गया है। इससे शहर में बसों की उपलब्धता अचानक घट गई है और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है।
यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि सिर्फ एक ही चरण नहीं, बल्कि आगामी चरणों के लिए भी कई बसों को पहले से रिजर्व कर लिया गया है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
यात्रियों की बढ़ी परेशानी, यूनियनों ने जताई चिंता
सिटी सबअर्बन बस सर्विस के महासचिव टिटू साहा ने कहा कि एक साथ बड़ी संख्या में बसों को चुनावी ड्यूटी में लगाने से आम जनता को दिक्कत हो रही है। उनका कहना है कि सामान्य दिनों में बसें लगभग 140 से 200 किलोमीटर तक चलती हैं, लेकिन चुनाव ड्यूटी के दौरान इन्हें 500 से 600 किलोमीटर तक चलना पड़ सकता है, जिससे वाहनों की हालत पर भी असर पड़ेगा।
यूनियनों ने परिवहन विभाग से अपील की है कि कम से कम 40 प्रतिशत बसों को आम जनता के लिए चालू रखा जाए, ताकि शहर की आवाजाही पूरी तरह ठप न हो।