अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों, जनप्रतिनिधियों और विश्वभर की लोकतांत्रिक संस्थाओं को शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने संसद को लोकतंत्र की आत्मा और जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों तथा विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति बताया।
'संसद तय करती है राष्ट्र के भविष्य की दिशा'
ओम बिरला ने कहा कि संसद वह सर्वोच्च मंच है, जहां विचारों का मंथन होता है, नीतियों का निर्माण किया जाता है और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय होती है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, स्वतंत्र और जवाबदेह संसद ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है और नागरिकों के अधिकारों की सबसे बड़ी संरक्षक भी।
भारत की संसद लोकतांत्रिक परंपराओं की मजबूत आधारशिला
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की संसद ने हमेशा संविधान की भावना, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनप्रतिनिधित्व की गौरवशाली विरासत को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि विविधताओं से भरे भारत में संसद ऐसा मंच है, जहां हर क्षेत्र, हर वर्ग और प्रत्येक नागरिक की आवाज़ को सम्मान मिलता है।
संसद की भूमिका सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं
ओम बिरला ने कहा कि वर्तमान समय में संसद की जिम्मेदारी केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना, जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा देना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना और नागरिकों के अधिकारों व कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करना भी संसद की अहम जिम्मेदारियों में शामिल है।
लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस लोकतंत्र की आत्मा—संवाद, सहमति, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संवैधानिक मर्यादाओं—को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लेने का महत्वपूर्ण अवसर है।
क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस?
हर वर्ष 30 जून को अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1889 में अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union - IPU) की स्थापना हुई थी। वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 30 जून को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस घोषित किया। इसका उद्देश्य दुनिया भर की संसदों की लोकतंत्र, सुशासन और मानवाधिकारों को मजबूत करने में भूमिका को रेखांकित करना है।
आईपीयू और सीपीए में भारत की अहम भूमिका
आईपीयू का मुख्यालय जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में स्थित है और इसमें 180 से अधिक राष्ट्रीय संसदें सदस्य हैं। भारत आईपीयू और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (CPA) का सक्रिय सदस्य है। सीपीए इंडिया रीजन में भारत की 32 संसदीय एवं विधायी शाखाएं शामिल हैं, जिन्हें 9 प्रशासनिक जोनों में विभाजित किया गया है। यह संगठन संसदीय लोकतंत्र, सुशासन, संवाद और विधायी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कार्य करता है।
सतत विकास लक्ष्यों से भी जुड़ा है यह दिवस
अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 16.7 को भी बढ़ावा देता है, जिसका उद्देश्य सभी स्तरों पर जवाबदेह, समावेशी, सहभागी और प्रतिनिधित्व आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करना है।