कोलकाता: कोलकाता नगर निगम (KMC) ने शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। निगम के भवन विभाग ने शहर के छह प्रमुख इलाकों में करीब 3,000 ऐसी इमारतों की पहचान की है, जिन पर निर्माण नियमों के गंभीर उल्लंघन के आरोप हैं। इन क्षेत्रों को निगम ने अनौपचारिक रूप से “रेड जोन” घोषित किया है।
तिलजला-तपसिया बना सबसे बड़ा ‘रेड जोन’
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक सबसे चिंताजनक स्थिति तिलजला-तपसिया इलाके की है। यहां करीब 1,000 अवैध इमारतों को ध्वस्तीकरण सूची में रखा गया है। माना जा रहा है कि पिछले 20 वर्षों में बने अधिकांश बहुमंजिला भवन बिना वैध अनुमति और नक्शा स्वीकृति के खड़े किए गए।
बिना मंजूरी बने बहुमंजिला भवन
तपसिया, तिलजला, चौभागा और ईएम बाइपास से सटे कई इलाकों में तेजी से अवैध निर्माण हुआ है। निगम सूत्रों का कहना है कि कई इमारतें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर बनाई गईं, जिससे भविष्य में बड़े हादसों का खतरा बढ़ गया है।
कार्रवाई में अधिकारियों को डर और दबाव
KMC अधिकारियों ने माना कि कई संवेदनशील इलाकों में कार्रवाई करना आसान नहीं है। स्थानीय दबाव, धमकी और टकराव की आशंका के कारण कई बार भवन विभाग के कर्मचारी इलाके में जाने से भी हिचकिचाते हैं। यही वजह है कि अवैध निर्माण लगातार बढ़ता गया।
इन इलाकों पर भी निगम की नजर
तिलजला-तपसिया के अलावा गार्डेनरीच-मेटियाबुरुज, एकबालपुर-खिदिरपुर, बड़ा बाजार-चितपुर और बाइपास से लगी कई कॉलोनियों को भी निगरानी सूची में रखा गया है। निगम का कहना है कि इन इलाकों में अनियंत्रित निर्माण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
गार्डेनरीच हादसे के बाद सख्ती
मार्च 2024 में गार्डेनरीच में अवैध इमारत ढहने से 9 लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे के बाद नगर निगम ने निगरानी और सख्ती बढ़ाने का फैसला लिया। अब विशेष टीम बनाकर नियमित अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।
बिजली-पानी कनेक्शन काटने की तैयारी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने CESC और KMC को अवैध इमारतों का ऑडिट करने और नियम तोड़ने वाले भवनों की बिजली व पानी सप्लाई बंद करने को कहा है।