कोलकाता: कोलकाता नगर निगम चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित सर्वदलीय बैठक में जिलाधिकारी की अनुपस्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी कार्यालय में हुई इस बैठक में चुनाव से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। हालांकि, बैठक में जिलाधिकारी अभिषेक तिवारी के मौजूद नहीं रहने और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दिए जाने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
चुनावी तैयारियों को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक
कोलकाता नगर निगम चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी तैयारियों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक में मतदान केंद्रों की प्रारंभिक सूची और मतदाता सूची के प्रारूप के प्रकाशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। चुनाव से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों को तैयारियों से संबंधित जानकारी देना इस तरह की बैठकों का अहम हिस्सा होता है। ऐसे में बैठक में उठाए गए मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों की विशेष नजर रही। हालांकि, बैठक के दौरान जिलाधिकारी की अनुपस्थिति को लेकर विवाद सामने आ गया। इसके बाद चुनावी तैयारियों के साथ-साथ प्रशासन की भूमिका भी चर्चा का विषय बन गई।
जिलाधिकारी अभिषेक तिवारी की अनुपस्थिति पर विवाद
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी अभिषेक तिवारी मौजूद नहीं थे। उनकी जगह अतिरिक्त जिलाधिकारी (चुनाव) बैठक में शामिल हुए थे। विपक्ष का कहना है कि चुनावी तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान जिलाधिकारी की मौजूदगी जरूरी थी। राजनीतिक दलों के मुताबिक, इस तरह की बैठक में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति से सवालों का स्पष्ट जवाब मिल सकता है। हालांकि, जिलाधिकारी की अनुपस्थिति के पीछे का आधिकारिक कारण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इस वजह से बैठक में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सवालों का जवाब दिए बिना बैठक छोड़ने का आरोप
विपक्षी दलों ने बैठक में मौजूद अतिरिक्त जिलाधिकारी (चुनाव) के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि अधिकारी ने अपनी बात रखने के बाद विपक्ष की ओर से उठाए गए विभिन्न सवालों का जवाब नहीं दिया। विपक्ष के मुताबिक, अधिकारी सवालों का समाधान किए बिना ही बैठक से बाहर चले गए। इससे राजनीतिक दलों को चुनावी तैयारियों से संबंधित मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। हालांकि, यह विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप है और इस संबंध में प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। इस घटनाक्रम ने बैठक के उद्देश्य और उसमें हुई चर्चा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विपक्ष ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और तैयारियों के बारे में सभी राजनीतिक दलों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। विपक्ष के अनुसार, मतदान केंद्रों की सूची और मतदाता सूची जैसे मुद्दे चुनाव की निष्पक्षता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की शंकाओं का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। विपक्ष का दावा है कि जिलाधिकारी की अनुपस्थिति और सवालों के जवाब नहीं मिलने से चुनावी तैयारियों की पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि करने वाली जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
कोलकाता नगर निगम चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
सर्वदलीय बैठक के बाद कोलकाता नगर निगम चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है। मतदान केंद्रों की प्रारंभिक सूची और मतदाता सूची के प्रकाशन जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। विपक्ष की नाराजगी के बीच अब प्रशासन के आधिकारिक पक्ष पर भी नजर रहेगी। चुनावी प्रक्रिया के दौरान सभी राजनीतिक दलों के सवालों का समाधान और जरूरी जानकारी साझा करना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, इस पूरे मामले में आगे प्रशासन क्या रुख अपनाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।