कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े उत्सव दुर्गा पूजा में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन कोलकाता के विश्वप्रसिद्ध कुम्हारटोली की कला की गूंज अब विदेशों तक पहुंच चुकी है। कुम्हारटोली के कलाकार इन दिनों विदेशी ऑर्डर्स को पूरा करने में दिन-रात जुटे हैं। इसी कड़ी में प्रख्यात मूर्तिकार कौशिक घोष द्वारा तैयार की गई मां दुर्गा की एक विशेष प्रतिमा अब अमेरिका के न्यूयॉर्क भेजी जा रही है।
8 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से होगी रवाना
यह विशेष प्रतिमा 8 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से समुद्री मार्ग के जरिए न्यूयॉर्क के लिए रवाना की जाएगी। विदेश में होने वाली दुर्गा पूजा के लिए इसे खास तकनीक से तैयार किया गया है ताकि लंबी समुद्री यात्रा के दौरान प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
17 किलो की फायर-प्रूफ और शॉक-प्रूफ प्रतिमा
करीब 5 फीट ऊंची इस प्रतिमा को पारंपरिक मिट्टी की बजाय फायर-प्रूफ और शॉक-प्रूफ फाइबर से बनाया गया है। इसका कुल वजन केवल 17 किलोग्राम है, जिससे इसे ले जाना आसान है और टूटने-फूटने का खतरा भी नहीं रहता। इस प्रतिमा को कई वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
डेढ़ महीने में तैयार हुई अनूठी प्रतिमा
मूर्तिकार कौशिक घोष ने बताया कि उन्हें न्यूयॉर्क की दुर्गा पूजा समिति से दो महीने पहले ऑर्डर मिला था। उनकी टीम ने करीब डेढ़ महीने तक मेहनत कर मां दुर्गा के सौम्य चेहरे, महिषासुर मर्दिनी स्वरूप, सिंह, अस्त्र-शस्त्र और मुकुट को पारंपरिक बंगाली राजबाड़ी शैली में तैयार किया है।
300 साल पुरानी परंपरा को मिल रही वैश्विक पहचान
करीब 300 वर्षों के इतिहास वाले कुम्हारटोली की मूर्तियां आज अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, सिंगापुर, जापान और यूएई सहित कई देशों में भेजी जाती हैं। प्रवासी भारतीय और बंगाली समुदाय दुर्गा पूजा के लिए कुम्हारटोली की प्रतिमाओं को ही प्राथमिकता देते हैं।
यूनेस्को की मान्यता के बाद बढ़ी विदेशी मांग
कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को द्वारा 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' का दर्जा मिलने के बाद कुम्हारटोली की मूर्तियों की अंतरराष्ट्रीय मांग में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कलाकारों ने आधुनिक फाइबर तकनीक अपनाई है, लेकिन अपनी पारंपरिक शिल्प शैली को बरकरार रखा है।
समुद्री सफर के लिए होगी विशेष पैकिंग
लंबी समुद्री यात्रा को देखते हुए प्रतिमा की विशेष थ्री-लेयर पैकिंग की जा रही है। इसे पहले वाटरप्रूफ सामग्री से सुरक्षित किया जाएगा, फिर मजबूत लकड़ी के विशेष बक्सों में सील किया जाएगा ताकि समुद्री नमी और झटकों से कोई नुकसान न हो। 8 जुलाई को यह प्रतिमा केवल मां दुर्गा की मूर्ति ही नहीं, बल्कि बंगाल की समृद्ध संस्कृति, आस्था और कुम्हारटोली के शिल्पकारों की कला को भी न्यूयॉर्क तक पहुंचाएगी।