नई दिल्ली/कृष्णनगर: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कृष्णनगर सांसद महुआ मोइत्रा नादिया सर्किट हाउस से कथित तौर पर देर रात बाहर निकाले जाने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। महुआ मोइत्रा की ओर से 24 अगस्त 2026 को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका का उल्लेख कर मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले की अर्जेंट लिस्टिंग से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने याचिका का उल्लेख सुनने के बाद कहा कि वह मामले को देखेगी। महुआ मोइत्रा का आरोप है कि उन्हें रात में नादिया सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया, जबकि उनके अनुसार कलकत्ता हाईकोर्ट से उन्हें सुरक्षा प्रदान करने वाला आदेश मौजूद था। उन्होंने इस कार्रवाई को अपने अधिकारों और एक निर्वाचित सांसद के साथ प्रशासन के व्यवहार से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
14 अगस्त की रात क्या हुआ था?
महुआ मोइत्रा के मुताबिक, यह घटना 14 अगस्त 2026 की रात की है। संसद सत्र समाप्त होने के बाद वह अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णनगर पहुंची थीं और शाम करीब 6:15 बजे नादिया सर्किट हाउस में ठहरी थीं। उनका दावा है कि रात करीब 9:47 बजे उन्हें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) की ओर से फोन आया और जिला मजिस्ट्रेट (DM) के निर्देश का हवाला देते हुए कमरा खाली करने के लिए कहा गया। इसके बाद रात करीब 10:52 बजे नाजिरथ डिप्टी कलेक्टर की ओर से उन्हें 12 अगस्त की तारीख वाला एक आदेश व्हाट्सऐप पर भेजा गया। आदेश में सर्किट हाउस में मरम्मत कार्य का हवाला देते हुए परिसर बंद किए जाने की बात कही गई थी। महुआ ने सवाल उठाया कि यदि सर्किट हाउस को बंद करने का आदेश पहले ही जारी हो चुका था, तो उन्हें वहां कमरा आवंटित करते समय इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
रात में भीड़ जुटने और सुरक्षा को लेकर भी उठाए सवाल
महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि देर रात सर्किट हाउस के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी और वहां नारेबाजी भी हुई। उनका दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हुई। उन्होंने इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों और घटनाक्रम के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि अदालत या आधिकारिक जांच के माध्यम से ही स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?
महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत में इस मामले को एक निर्वाचित सांसद के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। याचिका में कथित तौर पर यह तर्क दिया गया कि एक मौजूदा महिला सांसद को रात में उनके निर्वाचन क्षेत्र में स्थित आधिकारिक आवास से बाहर जाने के लिए कहा गया और इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। वकील ने मामले को संघवाद, सांसदों के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा संवैधानिक मुद्दा बताया।
लोकसभा अध्यक्ष से भी कर चुकी हैं शिकायत
सर्किट हाउस विवाद को लेकर महुआ मोइत्रा ने इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखा था। उन्होंने नादिया के जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ कथित तौर पर विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। अब मामले में महुआ मोइत्रा की सुप्रीम कोर्ट याचिका के बाद विवाद का कानूनी पहलू भी सामने आ गया है। फिलहाल शीर्ष अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की है और आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।