कोलकाता: कोलकाता के फूलबागान में पहली बार आयोजित हो रही फूलबागान सर्वजनीन दुर्गोत्सव में देशभक्ति और इतिहास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पूजा आयोजकों ने आनंदमठ की तर्ज पर पंडाल तैयार किया है। खास बात यह है कि बड़े बजट के बजाय स्थानीय आर्ट कॉलेज के विद्यार्थियों की कलाकारी और मेहनत से इस पंडाल को सजाया गया है। इसके साथ ही कुमारी पूजा में हरिजन कन्या की आराधना और नवमी के भोग में छोटे बकरे के मांस की व्यवस्था जैसे विशेष आयोजनों के जरिए पूजा समिति अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।
आनंदमठ के खंडहर मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल
फूलबागान सर्वजनीन दुर्गोत्सव का पंडाल आनंदमठ के जर्जर मंदिर की शैली में बनाया गया है। पंडाल के प्रवेश द्वार से ही श्रद्धालुओं को ‘वंदे मातरम्’ की रचना के इतिहास और आनंदमठ के साथ इस गीत के संबंध के बारे में जानकारी मिलेगी। इस तरह यहां आने वाले लोगों को मां दुर्गा के दर्शन के साथ-साथ देश के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का अवसर भी मिलेगा। वहीं, प्रतिमा में पारंपरिक बंगाली शैली की झलक देखने को मिलेगी। आयोजकों ने थीम की नवीनता के साथ मां दुर्गा के पारंपरिक स्वरूप को भी बनाए रखने का प्रयास किया है।
स्थानीय आर्ट कॉलेज के विद्यार्थियों ने सजाया पंडाल
इस दुर्गा पूजा के आयोजन में मुख्य सलाहकार डॉ. अर्चना मजूमदार की अहम भूमिका है। उनके सहयोग से फूलबागान सर्वजनीन दुर्गोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. मजूमदार के मुताबिक, इलाके के आर्ट कॉलेज के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और कलात्मक कौशल के जरिए पंडाल को तैयार किया है। सीमित बजट के बावजूद पूजा समिति के सदस्यों की मेहनत और सामूहिक प्रयास से इस आयोजन को आकार दिया गया है। समिति का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को मंच देना और पहले ही वर्ष में एक अलग तरह की कलात्मक अवधारणा के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित करना है।
कुमारी पूजा में हरिजन कन्या की होगी आराधना
इस बार पूजा में सामाजिक समानता का संदेश देने पर भी विशेष जोर दिया गया है। डॉ. अर्चना मजूमदार ने बताया कि फूलबागान सर्वजनीन में कुमारी पूजा के दौरान हरिजन समुदाय की एक कन्या की पूजा की जाएगी। आम तौर पर कई जगहों पर इस धार्मिक परंपरा के तहत ब्राह्मण कन्या को कुमारी के रूप में पूजने की प्रथा देखने को मिलती है। ऐसे में समिति की यह पहल सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को समान सम्मान देने के संदेश के रूप में पेश की जा रही है।
नवमी के भोग में छोटे बकरे के मांस की व्यवस्था
पूजा के दौरान खानपान को लेकर भी एक खास पहल की गई है। डॉ. अर्चना मजूमदार ने बताया कि नवमी के भोग में छोटे बकरे के मांस की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने इस आयोजन को भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद मछली और मांस खाने पर रोक लगने संबंधी चर्चाओं के संदर्भ में भी रखा। पूजा समिति का कहना है कि धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय परंपराओं और खानपान की विविधता को भी महत्व दिया जाएगा।
इस तरह फूलबागान सर्वजनीन दुर्गोत्सव में ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, आनंदमठ से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय कलाकारों की रचनात्मकता और सामाजिक समानता के संदेश को एक साथ प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।