कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस नीति' को एक बार फिर सख्ती से लागू करते हुए पश्चिम बर्दवान के रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात दो मोटर वाहन निरीक्षकों (एमवीआई) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों पर एक मालवाहक ट्रक चालक से कथित रूप से रिश्वत मांगने, वाहन को अवैध रूप से जब्त करने और समाप्त किए जा चुके कर के नाम पर 22 हजार रुपये की मांग करने का आरोप है। शिकायत सामने आते ही परिवहन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को जांच के लिए सौंप दिया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
पश्चिम बंगाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन के किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, उगाही या पद के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी नीति के तहत शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की गई। सरकार ने दोहराया कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी को संरक्षण नहीं मिलेगा। प्रशासनिक व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए लगातार निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। सरकार का उद्देश्य आम नागरिकों और परिवहन व्यवसायियों का भरोसा मजबूत करना है। अधिकारियों को भी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ अपने दायित्व निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मालवाहक ट्रक संख्या JH09BA3535 सर्विसिंग के बाद गैराज लौट रहा था। ट्रक के मालिक दीपक सिंह और चालक शिवा यादव ने आरोप लगाया कि पश्चिम बर्दवान के रामपुर चेकपोस्ट पर अधिकारियों ने वाहन को बिना उचित कारण रोक लिया। चालक पर कथित रूप से रिश्वत देने का दबाव बनाया गया और इंकार करने पर ट्रक को जब्त कर लिया गया। इतना ही नहीं, राज्य सरकार द्वारा पहले ही समाप्त किए जा चुके कर के नाम पर 22 हजार रुपये की मांग भी की गई। चालक ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत संबंधित विभाग से की। शिकायत मिलने के बाद परिवहन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।
परिवहन विभाग की त्वरित कार्रवाई
शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद परिवहन विभाग ने रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात मोटर वाहन निरीक्षक नाज़िमुल हक़ और अनुपम बनर्जी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1971 के नियम 7(1)(क) के तहत की गई है। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारी अपने पद पर कार्य नहीं करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी भी अधिकारी के साथ नरमी नहीं बरती जाएगी। इस कार्रवाई को सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। विभाग ने भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया है।
एसीबी करेगी आपराधिक जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सौंप दिया गया है। एसीबी पूरे घटनाक्रम की विस्तृत आपराधिक जांच करेगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच में रिश्वत मांगने, वाहन जब्त करने और अवैध वसूली के आरोपों की पड़ताल की जाएगी। सरकार ने कहा है कि दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी। साथ ही, जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
परिवहन व्यवसायियों को राहत देने के निर्देश
सरकार ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि जिन वाहनों को गलत तरीके से रोका गया है, उन्हें तत्काल मुक्त कराया जाए। साथ ही परिवहन व्यवसायियों और चालकों के साथ किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा गया है। चेकपोस्टों पर अधिकारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली की निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। सरकार का कहना है कि ईमानदार परिवहन व्यवसायियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इससे परिवहन क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार की कड़ी चेतावनी
राज्य सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए प्रशासन के सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार, उगाही या अवैध धन की मांग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि कोई अधिकारी इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और हर अधिकारी को जवाबदेह रहना होगा। प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कहीं भ्रष्टाचार की शिकायत हो तो उसकी जानकारी संबंधित विभाग को दें। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।