कोलकाता: बकाया वेतन और नौकरी से जुड़ी सुविधाएं किसी भी कर्मचारी के लिए बेहद जरूरी होती हैं। लेकिन अगर किसी कर्मचारी को महीनों तक अपने ही मेहनत के पैसे न मिलें, तो उसकी परेशानी का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां संदीप मंडल ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी परेशानी रखते हुए 62 महीने का बकाया वेतन दिलाने की मांग की है।
बांकुड़ा के बरजोड़ा से मुख्यमंत्री तक पहुंची फरियाद
बांकुड़ा जिले के बरजोड़ा के रहने वाले संदीप मंडल अपनी मांग लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचे। संदीप मंडल दास दामोदर कोल माइंस में कार्यरत हैं और बिजली विभाग के अंतर्गत दुर्गापुर प्रोजेक्ट से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अपनी नौकरी और वेतन से संबंधित समस्याएं रखीं। उनका कहना है कि लंबे समय से उन्हें वेतन और नौकरी से जुड़ी दूसरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
भारतीय मजदूर संघ से जुड़ाव के कारण कार्रवाई का आरोप
संदीप मंडल का आरोप है कि भारतीय मजदूर संघ से जुड़े होने की वजह से पिछली सरकार के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। इसी कारण उनका 62 महीने का वेतन और अन्य सुविधाएं बंद कर दी गईं। उनका दावा है कि इस फैसले के कारण उन्हें लंबे समय तक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री से बकाया वेतन दिलाने की मांग
संदीप मंडल ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि उनके मामले पर गंभीरता से विचार किया जाए और लंबे समय से रुका हुआ वेतन वापस दिलाने की व्यवस्था की जाए। उनकी मांग है कि 62 महीने के बकाया वेतन के साथ-साथ नौकरी से जुड़ी सभी सुविधाएं भी बहाल की जाएं। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्या रखने के बाद संदीप मंडल को कितनी राहत मिलती है और उनके बकाया भुगतान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।