सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ कार्यक्रम के तहत केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के बाद विपक्षी दल अब चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष की राजनीति का मुख्य उद्देश्य जनहित के बजाय सत्ता हासिल करना रह गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, पश्चिम बंगाल भाजपा के महासचिव बापी गोस्वामी, सिलीगुड़ी संगठनात्मक जिला अध्यक्ष अरुण मंडल, राजू साहा और प्रदेश भाजपा मीडिया संयोजक अनुपम घोष समेत पार्टी के कई नेता मौजूद रहे।
मोदी सरकार के 12 साल के विकास कार्यों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में हुए विकास कार्यों और भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने समाज के सभी वर्गों के कल्याण, आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर कई योजनाएं लागू की हैं।
उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से गरीबों को पक्का मकान, शौचालय, रसोई गैस, बिजली, खाद्यान्न और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिला है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में करीब 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
SIR के विरोध को लेकर कांग्रेस पर निशाना
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी दस बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई थी, लेकिन आज वही पार्टी इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है।
सोनोवाल के मुताबिक, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए और किसी विदेशी घुसपैठिए का नाम शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
घुसपैठ के मुद्दे पर कांग्रेस और TMC को घेरा
असम में अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए सोनोवाल ने कांग्रेस के शासनकाल में लागू IMDT कानून की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि 1983 में लागू इस कानून ने विदेशी नागरिकों की पहचान और उन्हें देश से बाहर निकालने की प्रक्रिया को प्रभावित किया था। उन्होंने असम आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने IMDT कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी घुसपैठ के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर कांग्रेस पर साधा निशाना
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस और भाजपा सरकार के कार्यकाल की तुलना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुश्मन की कार्रवाई का मजबूती से जवाब दिया है।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और पराक्रम की सराहना की। साथ ही आरोप लगाया कि देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मौकों पर भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने सेना के प्रयासों की आलोचना की।
चुनावी हार के बाद EVM और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप
सोनोवाल ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं पर आरोप लगाया कि चुनाव में हार मिलने के बाद वे कभी EVM तो कभी बैलेट पेपर से हुए चुनावों के नतीजों पर सवाल उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के बजाय इन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
कांग्रेस की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “Congress for Corruption, Congress for Communalism, Congress for Conflict।” यानी उनके आरोप के मुताबिक कांग्रेस की राजनीति भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है।
कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस के लंबे राजनीतिक शासन और मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि करीब 60 वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी गरीबी और विकास से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकी।
उन्होंने दावा किया कि 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना कर चुकी है। सोनोवाल के मुताबिक, जनता अब विकास और सुशासन की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है, जबकि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक और पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में लगे हैं।
उत्तर-पूर्व के विकास में 7 लाख करोड़ रुपये के कार्यों का दावा
सवाल-जवाब के दौरान सोनोवाल ने उत्तर-पूर्व भारत में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के विकास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में यह क्षेत्र लंबे समय तक उपेक्षित रहा, लेकिन मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों में यहां रेल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
उन्होंने रेल लाइनों के दोहरीकरण, विद्युतीकरण और परिवहन परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उत्तर-पूर्व भारत में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर-पूर्व को केवल भौगोलिक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का नया इंजन मानते हैं।
वैश्विक हालात के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का भरोसा
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के बावजूद भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार उर्वरक, LPG, LNG और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तथा मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का किया उल्लेख
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में सोनोवाल ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को विकसित और मजबूत राष्ट्र बनाने के लिए शांति, स्थिरता और विकास की निरंतरता जरूरी है। इसका सबसे बड़ा लाभ आने वाली पीढ़ियों और युवाओं को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना केवल किसी राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
अंत में केंद्रीय मंत्री ने लोगों से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए अराजकता और नकारात्मक राजनीति के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है।