कोलकाता: पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक आदेश के तहत राज्य भर के 252 मदरसों को बंद करने और 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी करने के फैसले पर राजनीति तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने इस प्रशासनिक कार्रवाई का पूर्ण समर्थन किया है। संवाददाताओं से बातचीत और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मनिरपेक्ष भारत में शिक्षा का प्रांगण किसी धार्मिक संस्था या रीति-रिवाज का केंद्र नहीं हो सकता। उन्होंने देश में 'एक देश, एक शिक्षा प्रणाली' लागू करने की वकालत की।
बुद्धदेव भट्टाचार्य के पुराने बयान का दिया हवाला
प्रशासनिक फैसले का स्वागत करते हुए शमिक भट्टाचार्य ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वामपंथी नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के पुराने रुख को याद किया। उन्होंने कहा कि यह कठोर फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने भी कभी खुले तौर पर कहा था कि खारीजी मदरसों की आड़ में क्या गतिविधियां चल रही हैं। हालांकि, उस समय वे अपनी पार्टी के आंतरिक दबाव के कारण पीछे हटने को मजबूर हुए थे। यदि उस समय वाममोर्चा सरकार ने बुद्धदेव भट्टाचार्य की चेतावनी पर ध्यान दिया होता, तो आज सीमावर्ती जिलों में ऐसी खतरनाक स्थिति पैदा नहीं होती।
स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों से सीपीआई(एम) पर तंज
दुर्गा पूजा पंडालों के बाहर सीपीआई(एम) द्वारा बुक स्टॉल लगाए जाने और नास्तिकता पर चल रही बहस को लेकर शमिक भट्टाचार्य ने वामपंथी नेता सुजन चक्रवर्ती पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूजा समिति की अनुमति से कोई भी बुक स्टॉल लगा सकता है, लेकिन प्रगतिशीलता और नास्तिकता की परिभाषा पर स्वामी विवेकानंद बहुत पहले ही जवाब दे चुके हैं। स्वामीजी के कथनों को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन धर्म कहता था कि जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता वह नास्तिक है, जबकि आधुनिक धर्म कहता है कि जो स्वयं पर विश्वास नहीं करता वह नास्तिक है। यदि सुजन चक्रवर्ती स्वामीजी की इस परिभाषा के तहत आते हैं, तो यह उनकी पार्टी के लिए चिंताजनक है।
तोषण और अंधविश्वास से मुक्त शिक्षा पर जोर
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दोहराया कि बच्चों के भविष्य को आधुनिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से ही संवारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को हर प्रकार के तुष्टीकरण और अंधविश्वास से मुक्त करके मुख्यधारा में लाना ही बीजेपी की स्पष्ट नीति है, ताकि हर बच्चे को धर्म-जाति से परे समान अधिकार और अवसर मिल सकें।