कोलकाता: साल्टलेक स्थित वेबेल भवन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव एवं बंगाल प्रभारी सुनील बंसल, प्रदेश महासचिव शशि अग्निहोत्री और राजारहाट-न्यूटाउन के विधायक पीयूष कनोडिया सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बंगाल के इतिहास में श्यामा प्रसाद मुखर्जी का योगदान अहम
प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में बदलाव आया है। उन्होंने देश के विभाजन के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसी मांग उठी थी कि गंगा के पूर्वी हिस्से से लेकर पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल कर दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्टों की ओर से भी इस तरह का प्रस्ताव रखा गया था।
20 जून 1947 के प्रस्ताव का किया जिक्र
समिक भट्टाचार्य ने 20 जून 1947 की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में यदुनाथ सरकार जैसे लोग भी आगे आए थे। उन्होंने कहा कि आज हम अपनी पहचान भारतीय के रूप में दे पा रहे हैं, तो इसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी का महत्वपूर्ण योगदान है।
'इतिहास को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता'
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को लंबे समय तक भुलाने की कोशिश की गई। उन्होंने उनकी मृत्यु का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भुला दिया गया और उनकी हत्या की गई, लेकिन इतिहास को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।
संघर्ष नहीं, कर्तव्य निभाने का दिया संदेश
अपने संबोधन के अंत में समिक भट्टाचार्य ने कहा कि आज बंगाल में बीजेपी की सरकार है। उन्होंने श्रमिक और मालिक के बीच संघर्ष की राजनीति से आगे बढ़कर सभी को अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का पालन करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, समाज और राज्य के विकास के लिए हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।