आसनसोल/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल और कुल्टी स्थित निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य साथी कार्ड के माध्यम से दी जाने वाली डायलिसिस सेवा अचानक बंद हो गई है। शनिवार को यह मामला सामने आने के बाद हर महीने सात से आठ बार डायलिसिस कराने वाले गरीब मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
तकनीकी जटिलता बनी वजह, CMOH ने स्वास्थ्य विभाग को भेजा पत्र
पश्चिम बर्धमान के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (CMOH) मोहम्मद यूनुस ने समस्या की पुष्टि करते हुए कहा कि नेफ्रोलॉजिस्ट या गुर्दा रोग विशेषज्ञ से जुड़ी तकनीकी या नियम संबंधी जटिलताओं के कारण सेवा बाधित हुई होगी। उन्होंने बताया कि इस गतिरोध को जल्द दूर करने के लिए जिला प्रशासन, राज्य स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य सेवा निदेशक के साथ पत्राचार कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
स्वास्थ्य साथी और आयुष्मान भारत के लिए नया SOP जारी
इस बीच, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में मरीज भर्ती के लिए नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत अस्पताल में पहुंचने वाले किसी भी मरीज का आधार नंबर पहले 'ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम' (TMS) पोर्टल पर जांचा जाएगा। यदि मरीज आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र है, तो पहले उसकी चिकित्सा आयुष्मान भारत के तहत ही शुरू की जाएगी।
पोर्टल में समस्या आने पर ही मिलेगा स्वास्थ्य साथी का लाभ
स्वास्थ्य भवन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि आयुष्मान भारत के पोर्टल पर कोई तकनीकी समस्या आती है, तो अस्पताल को विवरण और स्क्रीनशॉट अपलोड करना होगा। इसके बाद ही 'प्रसीद टू स्वास्थ्य साथी' (Proceed to Swasthya Sathi) का विकल्प सक्रिय होगा। यदि मरीज आयुष्मान भारत के योग्य नहीं है या उसकी सूची में नाम नहीं है, तो उसे 'मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना' के तहत स्वास्थ्य साथी से ही इलाज मिलेगा।
प्राइवेट अस्पताल एसोसिएशन ने किया फैसले का स्वागत
'एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स' के सचिव राजीव पांडे ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत लागू होने के बाद बनी भ्रम की स्थिति इस एसओपी से दूर हो जाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लगभग 8.5 करोड़ लोग स्वास्थ्य साथी से जुड़े हैं, जबकि 3.4 करोड़ लोग आयुष्मान भारत में नामांकित हैं।