17 अप्रैल 2026, शुक्रवार की सुबह लगभग 5:30 से 6:30 बजे के बीच आयकर विभाग की टीमों ने कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रशबिहारी विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक और दोबारा उम्मीदवार देबाशीष कुमार के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई उनके मनोहरपुकुर रोड स्थित आवास और रशबिहारी क्षेत्र में मौजूद चुनावी/पोलिंग कार्यालय पर की गई।
छापेमारी के दौरान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती की गई थी, जिसने दोनों परिसरों को पूरी तरह घेर लिया। बाहर TMC समर्थकों की भीड़ जमा हो गई और विरोध प्रदर्शन व नारेबाजी देखने को मिली, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई कथित तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और जमीन सौदों से जुड़े मामलों की जांच का हिस्सा मानी जा रही है।
ED जांच से जुड़ाव और पृष्ठभूमि
देबाशीष कुमार कोलकाता नगर निगम (KMC) में महापौर परिषद सदस्य(पार्क्स एवं गार्डन्स विभाग) की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही इस मामले से जुड़े आर्थिक लेनदेन और संपत्ति विवादों की जांच कर रहा है।
मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान ED ने इस केस में कई बार छापेमारी की थी और विधायक को 1, 3 और 9 अप्रैल को पूछताछ के लिए समन भी भेजा गया था। जांच का केंद्र कथित रूप से एक व्यवसायी अमित गांगोपाध्याय और उनसे जुड़े कुछ जमीन सौदों पर है, जिनमें आरोप है कि नगर निकाय के दस्तावेजी सिस्टम का इस्तेमाल कर विवादित जमीनों को वैध दिखाकर निवेशकों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को कुछ डिजिटल चैट और दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें जमीन सौदों और संपत्ति की जानकारी साझा किए जाने के संकेत बताए जा रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप
छापेमारी के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे पूरी तरह राजनीतिक कार्रवाई करार दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर दबाव बनाने और तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
स्थानीय तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दोनों स्थानों पर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार व विपक्षी दलों के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी की ओर से इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” और “चुनावी हस्तक्षेप” बताया गया है। इससे पहले भी ED की कार्रवाई को लेकर TMC नेताओं ने इसे “चुनाव पूर्व दबाव की रणनीति” बताया था।
चुनावी संदर्भ में बढ़ा सियासी तनाव
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को निर्धारित है। रशबिहारी सीट पर मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है, जहां तृणमूल कांग्रेस ने देबाशीष कुमार को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने स्वपन दासगुप्ता को मैदान में उतारा है। राज्य में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है, ऐसे में चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
मौजूदा स्थिति
अब तक किसी तरह की गिरफ्तारी या बड़ी जब्ती की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छापेमारी के दौरान विधायक के मौजूद रहने की जानकारी सामने आई है। एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल जारी है या हाल ही में संपन्न हुई है, इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है।