कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक नियुक्तियों और जादवपुर विश्वविद्यालय में जारी छात्र संगठनों के टकराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। SFI और DYFI की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य वर्णना मुखर्जी ने एक विशेष बातचीत में राज्य के 247 सहायता प्राप्त कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में भाजपा नेताओं की नियुक्ति, जादवपुर विश्वविद्यालय में ABVP-SFI विवाद और 28 अगस्त को प्रस्तावित ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा और राज्य सरकार पर निशाना साधा। वर्णना मुखर्जी ने आरोप लगाया कि शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है और सत्ता परिवर्तन के बावजूद कॉलेजों की व्यवस्था में राजनीतिक दखल की संस्कृति खत्म नहीं हुई है।
247 कॉलेजों में BJP नेताओं की नियुक्ति पर सवाल
राज्य के सहायता प्राप्त कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में भाजपा के विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर SFI नेत्री ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की राजनीति में फर्क नहीं रह गया है। उनके मुताबिक, जिस तरह पहले टीएमसी नेताओं पर कॉलेजों में राजनीतिक दबदबे के आरोप लगते थे, उसी तरह अब भाजपा नेताओं को इन संस्थानों में जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। वर्णना मुखर्जी ने कहा कि अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा किया जा रहा है, तो उसका आधार राजनीतिक नेताओं की नियुक्ति नहीं बल्कि छात्रों और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धर्म और जाति की राजनीति के जरिए समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाया जा रहा है, जिसका असर शैक्षणिक परिसरों पर भी पड़ रहा है।
ABVP-SFI विवाद को बताया वैचारिक संघर्ष
जादवपुर विश्वविद्यालय सहित विभिन्न परिसरों में ABVP और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हालिया टकराव पर बोलते हुए वर्णना मुखर्जी ने इसे महज छात्र संगठनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई मानने से इनकार किया। उनके अनुसार, यह विचारधाराओं के बीच संघर्ष है। उन्होंने कहा कि वामपंथी संगठनों की भाजपा और RSS के खिलाफ लड़ाई राजनीतिक और वैचारिक दोनों स्तरों पर है। राष्ट्रवाद को लेकर भाजपा और RSS पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वामपंथी छात्र संगठनों को भाजपा नेताओं से राष्ट्रवाद का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सावरकर के ब्रिटिश शासन के साथ संबंधों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक प्रेरणा भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस और गणेश घोष जैसे स्वतंत्रता सेनानियों से आती है।
‘जादवपुर को देशविरोधी बताने की कोशिश’
वर्णना मुखर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा जादवपुर विश्वविद्यालय को निशाना बना रही है क्योंकि परिसर में उसकी राजनीतिक और वैचारिक गतिविधियों का विरोध होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का इतिहास छात्र आंदोलनों और लोकतांत्रिक प्रतिरोध से जुड़ा रहा है। उनके मुताबिक, इसी वजह से परिसर को बार-बार राजनीतिक विवादों के केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, भाजपा और ABVP की ओर से लगाए गए आरोपों और जादवपुर विश्वविद्यालय में हालिया घटनाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दावे सामने आए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
28 अगस्त के ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम पर भी निशाना
जादवपुर विश्वविद्यालय में 28 अगस्त को प्रस्तावित ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम को लेकर भी SFI नेत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद की बात करने वालों को सबसे पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और संवैधानिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, राष्ट्रवाद को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री और सत्ता पक्ष के नेताओं के विश्वविद्यालय दौरे को लेकर उन्होंने चेतावनी दी कि अगर परिसर में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने या हिंसा की स्थिति पैदा करने की कोशिश हुई, तो SFI उसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय का इतिहास प्रतिरोध का रहा है और संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगा।
जादवपुर फिर बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
जादवपुर विश्वविद्यालय पिछले कुछ दिनों से छात्र राजनीति, ABVP-SFI टकराव, परिसर में हिंसा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा में है। अब 28 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिसर में शैक्षणिक माहौल बनाए रखने और किसी भी संभावित टकराव को रोकने की होगी।