कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को राज्य में पूरी तरह लागू करने की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने सोमवार को कहा कि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और जल्द ही लंबित प्रक्रियाओं को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में कुछ पीछे रहा है, लेकिन अब इसे गति देने के लिए शिक्षा विभाग स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। न्यू टाउन स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में उन्होंने अधिकारियों को नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए।
शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एनसीईआरटी से होगा समझौता
राज्य सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी के साथ जल्द ही एक समझौता ज्ञापन करने की तैयारी में है। इस समझौते के बाद शिक्षकों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और उन्हें नई शिक्षा नीति के अनुरूप पढ़ाने की तकनीक तथा शैक्षणिक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री के मुताबिक, एनसीईआरटी राज्य को तकनीकी और अकादमिक दोनों स्तरों पर सहायता देगा। इसका उद्देश्य केवल नीति को सरकारी दस्तावेजों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसके प्रावधानों को स्कूलों और कक्षाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों और विद्यालय निरीक्षकों को भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा से तय होगा पढ़ाई का नया ढांचा
नई शिक्षा व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा को आधार बनाकर राज्य में पाठ्यक्रम और पुस्तकों की तैयारी की जाएगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि विद्यार्थियों को क्या पढ़ाया जाए, किस तरीके से पढ़ाया जाए और उनके सीखने का आकलन किस प्रकार किया जाए। मंत्री ने बताया कि राज्य की पाठ्यक्रम समिति भी राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा से मार्गदर्शन लेकर नए पाठ्यक्रम को तैयार करेगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक, आधुनिक और सीखने की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाना है। नई व्यवस्था में केवल विषयों की जानकारी देने के बजाय विद्यार्थियों की समझ, कौशल और सीखने की क्षमता को भी महत्व देने की कोशिश की जाएगी।
2028 शैक्षणिक सत्र से लागू होंगी नई किताबें
पश्चिम बंगाल में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार होने वाली पाठ्यपुस्तकों को 2028 के शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाने की तैयारी है। मंत्री के अनुसार, इन पुस्तकों और पाठ्यक्रम को तैयार करने में एनसीईआरटी से आवश्यक सहयोग लिया जाएगा। इससे राज्य के पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर पर तय शैक्षणिक दिशा और स्थानीय जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश होगी। नई पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों को बदलते समय और शिक्षा की नई आवश्यकताओं के अनुरूप अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पाठ्यक्रम निर्माण की पूरी प्रक्रिया में राज्य की अपनी शैक्षणिक जरूरतों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।
निजी स्कूलों के आंकड़ों को लेकर सरकार की चिंता
कार्यशाला के दौरान राज्य में स्कूलों से जुड़े आंकड़ों की स्थिति को लेकर भी चिंता सामने आई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में निजी स्कूलों ने विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी यूडीआईएसई पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। इसके कारण राज्य में विद्यार्थियों के नामांकन की वास्तविक तस्वीर सामने आने में परेशानी हो रही है। सरकार के लिए यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा से जुड़ी योजनाओं, संसाधनों और नीतियों के निर्माण में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या और स्कूलों से संबंधित सटीक जानकारी की भूमिका होती है। ऐसे में विभाग अब आंकड़ों को व्यवस्थित और अद्यतन करने के साथ-साथ नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को स्कूल स्तर तक पहुंचाने पर जोर दे रहा है।
शिक्षकों से लेकर विद्यार्थियों तक बदलेगा शिक्षा का अनुभव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह लागू करने की दिशा में पश्चिम बंगाल का यह प्रयास राज्य की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का आधार बन सकता है। यदि एनसीईआरटी के साथ प्रस्तावित समझौता प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो शिक्षकों को प्रशिक्षण और अकादमिक मार्गदर्शन मिलने के साथ नई पाठ्यचर्या को स्कूलों में उतारना आसान हो सकता है। 2028 से नई पुस्तकों और पाठ्यक्रम के लागू होने के बाद विद्यार्थियों के सीखने और मूल्यांकन की प्रक्रिया में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नीति संबंधी निर्णयों को स्कूलों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाता है। साथ ही शिक्षकों का प्रशिक्षण, विद्यालयों की तैयारी और विद्यार्थियों से जुड़े सटीक आंकड़ों का संकलन इसके क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण कड़ियां साबित होंगे।