भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने जून 2026 के दौरान अपने ऑनलाइन शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म SCORES के माध्यम से 5,037 निवेशक शिकायतों का समाधान किया। इस दौरान नई शिकायतों और लंबित मामलों में भी मामूली कमी दर्ज की गई, जो निवेशकों के लिए राहत की खबर है।
जून में 5,037 शिकायतों का हुआ समाधान
सेबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में SCORES (SEBI Complaints Redress System) प्लेटफॉर्म के जरिए कुल 5,037 निवेशक शिकायतों का निपटारा किया गया। इसी अवधि में 5,035 नई शिकायतें भी दर्ज हुईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियामक लगातार शिकायतों के समाधान पर तेजी से काम कर रहा है।
लंबित शिकायतों की संख्या में आई कमी
जून के अंत तक लंबित शिकायतों की संख्या 5,537 से घटकर 5,524 रह गई। हालांकि यह कमी मामूली है, लेकिन यह संकेत देती है कि सेबी लंबित मामलों के निपटारे की दिशा में लगातार प्रयासरत है।
तीन महीने से अधिक लंबित सिर्फ 17 शिकायतें
सेबी के मुताबिक, जून के आखिर तक सूचीबद्ध कंपनियों और बाजार से जुड़े संस्थानों से संबंधित केवल 17 शिकायतें ऐसी थीं, जो तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं। इनमें आदित्य बिड़ला मनी लिमिटेड, फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज और एचबीएल पावर सिस्टम्स जैसी कंपनियों से जुड़े मामले शामिल हैं।
ATR जमा करने में औसतन लगे सिर्फ 4 दिन
नियामक ने बताया कि जून के दौरान कंपनियों और संबंधित संस्थानों ने निवेशकों की शिकायतों पर औसतन 4 दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट (Action Taken Report-ATR) जमा की। वहीं, प्रथम स्तर की समीक्षा (First-Level Review) से जुड़ी शिकायतों का औसत निपटारा 8 दिनों में किया गया।
SCORES 2.0 से शिकायत समाधान हुआ अधिक पारदर्शी
सेबी ने स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों के आंकड़ों में ऐसे मामले भी शामिल हैं, जिनमें संबंधित संस्थाओं ने निर्धारित समय के भीतर ATR जमा कर दी है, लेकिन यदि शिकायतकर्ता जवाब से संतुष्ट नहीं होता, तो उसे समीक्षा का अधिकार प्राप्त होता है। SCORES 2.0 प्रणाली के तहत शिकायत सीधे संबंधित कंपनी या संस्था को भेजी जाती है, जिसे 21 दिनों के भीतर ATR प्रस्तुत करनी होती है। यदि निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं होता, तो वह 15 दिनों के भीतर प्रथम स्तर की समीक्षा का अनुरोध कर सकता है। इसके बाद भी समाधान न मिलने पर दूसरे स्तर की समीक्षा में सेबी स्वयं मामले की जांच करती है। इसके अलावा निवेशकों के पास ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) प्रणाली का विकल्प भी उपलब्ध है।