होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, निफ्टी भी दबाव में।
होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा, निफ्टी भी दबाव में।
मुंबई : वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत बेहद खराब रही। सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लडी मंडे’ देखने को मिला, जहां सेंसेक्स करीब 1600 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी में भी भारी दबाव नजर आया।
कारोबार की शुरुआत में ही बीएसई सेंसेक्स करीब 75,900 के स्तर के आसपास खुलकर 1600 अंकों से ज्यादा टूट गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी लगभग 23,600 के स्तर पर 400 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। प्री-ओपन सत्र में ही बाजार में बड़ी बिकवाली के संकेत मिल गए थे, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।
गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त कदम उठाने और नौसैनिक गतिविधियां बढ़ाने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक माना जाता है, ऐसे में किसी भी व्यवधान की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया वार्ता बेनतीजा खत्म होने के बाद जोखिम लेने की भूख घट गई है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम समेत कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे आने वाले समय में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर वैश्विक निवेशकों के रुख पर पड़ा है।
तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि शेयर बाजार पर इसका नकारात्मक असर साफ दिख रहा है।
बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। खासकर आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे, जिससे बाजार की कमजोरी और बढ़ गई।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उस रैली पर ब्रेक लगा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो हालिया तेजी का बड़ा हिस्सा खत्म हो सकता है।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इस महीने अब तक उन्होंने हजारों करोड़ रुपये की निकासी की है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच उनका सतर्क रुख निवेशकों के लिए चिंता का कारण है।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। महंगाई से जुड़े आंकड़े, चौथी तिमाही के नतीजे और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करेंगे। इसके अलावा सप्ताह के बीच में अवकाश होने के कारण कारोबार के दिन कम रहेंगे, जिससे उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया की स्थिति निवेशकों के लिए सबसे अहम संकेतक रहेंगी। ऐसे में निवेशकों को सतर्कता के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।