मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। अमेरिका-ईरान संघर्ष को खत्म करने की दिशा में तत्काल ठोस प्रगति नहीं होने और कच्चे तेल की कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने से निवेशकों का सेंटीमेंट दबाव में रहा। बाद में बिकवाली बढ़ने से निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे चला गया और सेंसेक्स में भी 300 अंकों से अधिक की गिरावट देखी गई।
मामूली गिरावट के साथ हुई शुरुआत
शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 0.09 फीसदी की गिरावट के साथ 24,343.45 के स्तर पर खुला, जबकि सेंसेक्स 0.15 फीसदी गिरकर 77,892.92 पर रहा। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ दबाव बढ़ा। सोमवार को निफ्टी करीब 24,282 के स्तर तक फिसला, जबकि सेंसेक्स 77,647 के आसपास आ गया।
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल कारोबार में निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे ज्यादा कमजोर रहा। इसमें करीब 0.98 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी PSU बैंक और FMCG इंडेक्स में भी करीब 0.9 फीसदी तक की कमजोरी रही। इसके अलावा रियल्टी, सीमेंट, IT, एनर्जी और प्राइवेट बैंक से जुड़े शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। दूसरी ओर, निफ्टी केमिकल्स और मिडस्मॉल हेल्थकेयर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली।
89 डॉलर के आसपास कच्चा तेल
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की कीमत बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के तत्काल समाधान की संभावना कमजोर रहने से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऊंचे तेल भाव भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय हैं। इससे महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है।
IT और बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाया दबाव
बाजार में बड़ी IT कंपनियों और प्रमुख बैंकिंग शेयरों में कमजोरी का असर भी प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। विश्लेषकों के मुताबिक फिलहाल घरेलू बाजार के लिए बड़े ट्रिगर सीमित हैं, जबकि कच्चे तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में भी सोमवार को कारोबार मिला-जुला रहा, जिससे भारतीय बाजार को कोई मजबूत सकारात्मक संकेत नहीं मिला।
कॉरपोरेट नतीजों से मिल सकता है सहारा
हालांकि बाजार के लिए पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों में व्यापक बाजार के प्रदर्शन को देखते हुए कमाई में सुधार की उम्मीद बनी हुई है। अगर कंपनियों के मुनाफे में सुधार जारी रहता है, तो ऊंचे कच्चे तेल और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम जैसी चुनौतियों के बावजूद घरेलू शेयर बाजार को कुछ मजबूती मिल सकती है।