श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे अप्रैल 2025 के पहलगाम-बैसरन आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल मानती थीं। उस हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय घोड़ा संचालक समेत 26 लोगों की मौत हुई थी। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मंगलवार को मिली विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर यूसमर्ग के कोराग इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। तलाशी के दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी। सेना के अनुसार, इसके बाद छिपे आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और मुठभेड़ शुरू हो गई। कार्रवाई के बाद पालमेदन इलाके से हाशिम मूसा का शव और युद्ध संबंधी सामग्री बरामद की गई।
यूसमर्ग के जंगलों में चला ऑपरेशन
सेना के चिनार कॉर्प्स के अनुसार, अभियान विशिष्ट खुफिया इनपुट पर आधारित था। सुरक्षाबलों ने कोराग क्षेत्र में तलाशी शुरू की थी। संदिग्ध गतिविधि सामने आने के बाद जवानों ने इलाके को घेरा और आतंकियों को चुनौती दी। जवाब में गोलीबारी शुरू होने के बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की, जिसमें एक आतंकी मारा गया। बाद में उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान जारी रखा गया, ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की संभावना को खारिज किया जा सके। सुरक्षा एजेंसियों ने बरामद हथियारों और अन्य सामग्री की भी जांच शुरू कर दी है।
कौन था हाशिम मूसा?
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक हाशिम मूसा पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकवादी था। उसका नाम जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा गया था। वह कथित तौर पर 2023 में भारत में घुसा था और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने पर 20 लाख रुपए के इनाम की घोषणा भी की थी। कई रिपोर्टों में मूसा के पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) से जुड़े रहने या पूर्व पैरा-कमांडो होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि सभी आधिकारिक दस्तावेजों में समान रूप से नहीं हुई है, इसलिए इसे सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के तौर पर ही देखा जा रहा है। मूसा को 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम-बैसरन हमले की साजिश से जुड़े प्रमुख आरोपियों में माना गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में भी उसका नाम सामने आया था।
लश्कर के चार सदस्यीय समूह का अंत
मूसा की मौत के साथ सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के एक चार सदस्यीय आतंकी समूह के सभी प्रमुख सदस्य मारे जा चुके हैं। इस समूह में मूसा के अलावा जुनैद भट, सुलेमान शाह और यासिर का नाम शामिल था। तीनों को पहले अलग-अलग अभियानों में मार गिराया गया था। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक इस समूह को जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों से जोड़ा गया था। इनमें सुरक्षा बलों पर हमले और नागरिकों को निशाना बनाने वाली घटनाएं शामिल हैं। मूसा की मौत के बाद इस समूह की सक्रिय मौजूदगी समाप्त हो गई है।
पहलगाम हमले के सभी चार हमलावर मारे जाने का दावा
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मूसा की मौत के साथ पहलगाम हमले में शामिल बताए गए चार आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई है। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन में हुए हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि जम्मू-कश्मीर में लश्कर का पूरा नेटवर्क समाप्त हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मूसा की मौत को संगठन के जम्मू-कश्मीर नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया है, लेकिन क्षेत्र में आतंकवाद और सीमा पार से संचालित नेटवर्क के खिलाफ अभियान जारी है।