नई दिल्ली - दिवाली से पहले चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी साल जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची चांदी अब अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। 29 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी का भाव करीब ₹4.20 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, जबकि 30 अक्टूबर को दिसंबर वायदा अनुबंध में इसका भाव गिरकर करीब ₹1.85 लाख से ₹1.87 लाख प्रति किलो के दायरे में आ गया। इस तरह जनवरी के उच्च स्तर से कीमत में लगभग 56 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
इस तेज गिरावट ने निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या मौजूदा कीमतों पर चांदी खरीदना फायदेमंद हो सकता है या अभी और गिरावट की आशंका बनी हुई है? साथ ही, बाजार में यह चर्चा भी है कि चांदी का भाव आगे किस स्तर तक जा सकता है।
MCX पर ₹1.85 लाख के करीब पहुंची चांदी
30 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के दिसंबर 2026 वायदा अनुबंध में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान भाव करीब ₹1,85,723 प्रति किलो तक फिसला। एक अन्य बाजार अपडेट में इसका भाव ₹1,86,723 प्रति किलो दर्ज किया गया। दिन के कारोबार में कीमतों में लगभग 1.5 से 2 प्रतिशत तक की कमजोरी रही।
जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट आ चुकी है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि MCX वायदा भाव और बाजार में मिलने वाली फिजिकल चांदी की कीमत अलग हो सकती है। फिजिकल चांदी के भाव पर टैक्स, मेकिंग या अन्य स्थानीय लागतों का भी असर पड़ता है।
COMEX पर भी दबाव में चांदी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 30 अक्टूबर के बाजार अपडेट के अनुसार, COMEX पर चांदी करीब 50 से 51 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। हालांकि, भारत में चांदी का भाव तय होने में रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी अहम भूमिका निभाती है।
निवेशकों के सामने बड़ा सवाल: अभी खरीदें या इंतजार करें?
कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मौजूदा स्तर चांदी खरीदने का अवसर है। लेकिन केवल कीमत का अपने पुराने उच्च स्तर से नीचे आ जाना इस बात की गारंटी नहीं देता कि बाजार में गिरावट रुक गई है।
चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय मांग, औद्योगिक इस्तेमाल, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की स्थिति और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझना जरूरी है।
एक्सपर्ट से समझा जा रहा है गिरावट का गणित
चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट और आगे की संभावनाओं को समझने के लिए जागरण बिजनेस ने सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एवं कमोडिटी एक्सपर्ट इंद्र कमल तिवारी से बातचीत की है। इस बातचीत का उद्देश्य यह जानना है कि मौजूदा गिरावट के पीछे कौन-से बाजार कारक काम कर रहे हैं और निवेशकों को आगे किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
चांदी का अगला रुख तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेत और घरेलू मांग की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार के उतार-चढ़ाव और विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखना जरूरी है।