नई दिल्ली। देश में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। मई 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई, जो पिछले 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले अप्रैल में थोक महंगाई 8.26% दर्ज की गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई इतनी ऊंचाई पर पहुंची है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन, अनाज और खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को तेज किया है।
फ्यूल और जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उछाल
मई महीने में ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे ज्यादा महंगाई दर्ज की गई। फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर अप्रैल के 24.89% से बढ़कर 30.33% पर पहुंच गई। वहीं रोजमर्रा की जरूरत के सामानों की महंगाई भी 3.78% से बढ़कर 4.99% हो गई। खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई 3.11% से बढ़कर 4.49% दर्ज की गई, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
अनाज और खाद्य तेलों ने बढ़ाई मुश्किलें
थोक बाजार में अनाज, खाद्य तेल और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा प्रभाव ईंधन और परिवहन लागत पर पड़ रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी असर
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर भी अप्रैल के 6.68% से बढ़कर मई में 7.48% हो गई। इससे उद्योगों की लागत बढ़ रही है और आने वाले समय में इसका असर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
रिटेल महंगाई भी बढ़कर 3.93% पहुंची
मई महीने में खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48% थी। पिछले पांच महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% लक्ष्य के बेहद करीब पहुंची है। इससे भविष्य में मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि थोक महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो इसका असर धीरे-धीरे बाजार में बिकने वाले उत्पादों की कीमतों पर दिखाई देगा। उद्योगों की लागत बढ़ने पर उपभोक्ता वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। खासतौर पर खाद्य पदार्थ, ईंधन, परिवहन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
कैसे मापी जाती है महंगाई?
भारत में महंगाई को मुख्य रूप से दो तरीकों से मापा जाता है—थोक महंगाई (WPI) और खुदरा महंगाई (CPI)। WPI उन कीमतों को दर्शाती है जिन पर थोक बाजार में कारोबार होता है, जबकि CPI आम उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों को मापती है। थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों का वेटेज सबसे अधिक 64.23% है, जबकि प्राइमरी आर्टिकल्स का 22.62% और फ्यूल एंड पावर का 13.15% हिस्सा होता है।