जिले में कुछ दिनों से ठंड ने जोर पकड़ लिया है। बुधवार रात सीजन की सबसे सर्द रात रही। शहरी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 6.7 डिसे रिकॉर्ड किया गया। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 4.5 डिसे रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार सुबह जिले के चौरई सहित कई क्षेत्रों में ओस की बूंदें फसलों पर जमी दिखाई दी। आलम यह था कि खेतों में पड़ी लकडिय़ों पर बर्फ की परत जम गई थी। पाला पडऩे से खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। आगामी समय में अगर ऐसा ही मौसम रहा तो फसल काफी प्रभावित होगी। सुबह 8 बजे धूप निकलने के बावजूद खेतों में पड़ी पानी की पाइप के ऊपर बर्फ की चादर बिछी हुई थी। किसानो ने बताया कि दो एकड़ में गेहूं एवं सरसों की फसल बोई है। जिसमें फूल आ गए हैं। पाला पडऩे की वजह से खेतों में अब नुकसान होगा। मौसम वैज्ञानिक संत कुमार शर्मा ने बताया किआगामी दो से तीन दिन ऐसे ही ठंड पडऩे की संभावना है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का असर छिंदवाड़ा में खत्म हो गया है। इसलिए यहां ठंड पड़ रही है। लेकिन आगामी समय में एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इससे तापमान में वृद्धि होगी और ठंड का जोर कम पडऩे लगेगा। बता दें कि पांच-छह दिनों से मौसम में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दिन में कभी धूप तो कभी बादल तो कभी बारिश तो कभी ठंडी हवाएं चली। तीन दिनों से शाम होते ही ठंड जोर पकड़ ले रही है और पूरी रात लोग ठिठुर रहे हैं। पाला पडऩे लगा है। ठंड व शीतलहर के कारण फसलों की सेहत पर भी असर पड़ा हैं
बुधवार रात सीजन की सबसे सर्द रात रही। शहरी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 6.7 डिसे रिकॉर्ड किया गया।
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