हरदा। अभी तक मामा के बुलडोजर का इस्तेमाल लोग खुदाई और सफाई करने के लिए किया करते थे। लेकिन शिवराज सरकार ने बुलडोजर का इस्तेमाल अपराधियों के घरों-दुकानों को जमीदोंज करने के लिए किया है। अब हरदा में मामा के बुलडोजर का अलग अंदाज देखने को मिला है। बुलडोजर का इस्तेमाल गेहूं उठाने और रखने में हो रहा है।
हरदा कृषि मंडी में गेहूं की आवक बंपर होने की वजह से मजदूरों की कमी पड़ गई है। वहीं मौसम परिवर्तन के चलते मंडी परिसर में खुले में पड़े हजारों क्विंटल गेहूं से व्यापारी चिंतिंत नजर आ रहे हैं। लिहाजा गेहूं को जल्दी गोडाउन तक पहुंचाने के लिए अब व्यापारी जेसीबी और डम्पर का सहारा ले रहे हैं।
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जिले में किसानों को समर्थन मूल्य से अधिक गेहूं के भाव मंडी में मिल रहे है। इस कारण से मंडी में बंपर आवक हो रही है। कृषि उपज मंडी में हर तरफ गेहूं के ढेर और बोरों की थप्पी लगी है। आलम यह है कि, परिसर में अब जगह नहीं बची है। करीब 3.40 लाख क्विंटल गेहूं परिसर में खुले में रखे हैं। ऊपर से बादल छाने की वजह से व्यापारियों में घबराहट है।
इसी वजह से व्यापारी जल्दी-जल्दी में खुले में रखे गेहूं को समेटने की जुगत में हैं। इसी वजह से गेहूं के ढेर को व्यापारी जेसीबी की मदद से डंपर में भरकर गोदाम तक पहुंचा रहे हैं। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं के दाम 2014 रुपये क्विंटल है। मंडी में 2050 से 2150 रुपये क्विंटल तक गेहूं बिक रहा है।
एक तो समर्थन से अधिक दाम, दूसरा 1 लाख रुपये तक नकद भुगतान, इन दोनों वजह से किसान मंडी में गेहूं बेच रहे हैं। इस मामले में मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि, हम्मालों की तुलना में कई ज्यादा गेहूं विक्रय हेतु आ रहा है। जिससे बोरियों में गेहूं भरकर गोदाम तक नहीं पहुंच पा रहा है। रोजाना लगभग 20 हजार क्विंटल गेहूं विक्रय हेतु आ रहा है। गेहूं अधिक होने के कारण मजदूर कम पड़ गए हैं।
इसलिए 1-2 व्यापारी द्वारा जेसीबी और डंपर से गेहूं अपने गोदाम तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं व्यापारी द्वारा इस मामले में कुछ भी कहने से मना कर दिया है और जेसीबी और डम्पर से परिवहन बंद कर दिया गया है।
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