Bhopal: मध्यप्रदेश में पिछले तीन सालों से टीबी के मरीज़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि भोपाल में दूसरे जिलों के लोग भी जांच कराने के लिए आते हैं। अनुमान के अनुसार प्रति लाख आबादी पर टीबी के 216 मरीज होते हैं। लेकिन हकीकत इससे दोगुने मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में साफ है कि कई जिलों में जांचों की संख्या कम होने की वजह से नए मरीजों की पहचान नहीं हो पा रही है।
नियमित इलाज से छह महीने में ठीक हो जाते हैं मरीज
टी.बी. रोग विशेषज्ञ डॉ मनोज वर्मा की माने तो, पहले जाँच का दायरा बहुत कम था। लेकिन अब जाँच का दायरा बड़ा है, तो क्षय रोगियों की संख्या भी बड़ी है। पहले भी ये बीमारी होती थी लेकिन उनकी सही जाँच नही होने से पता नही चल पाता है। डॉ वर्मा ने कहा कि, अब नई तकनीकि आने से इलाज भी आसान हुआ है। स्मोकिंग करने वाले खदान पर काम करने वाले मजदूर शुगर रोगी या जिनको 2 हफ्ते से ज्यादा खासी है। उनकी भी जाँच की जा रही है। दरअसल, मरीजों की पहचान करने के लिए अभियान चलाया जाता हैं। डॉक्टर टी.बी. मरीजों के स्वजन की जांच करते हैं। ज्यादा जांचों की वजह से मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। नियमित इलाज से करीब छह महीने में मरीज ठीक हो जाते हैं।संवाददाता- उत्सव गुप्ता
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