कहते है। पंख ही काफी नहीं है आसमानों के लिए, हौसला भी चाहिए ऊँची उड़ानों के लिए। जावरा की बेटी ने पिता का नाम रोशन किया। बन गई सिविल जज, अपने पिता के साथ कोर्ट परिसर में फोटो कॉपी की दुकान में हाथ बटाने समय न्यायाधीश को आता जाता देख मिली प्रेरणा।
न्यायाधीश को आते - जाते देख न्यायाधीश बनने की प्रेरणा मिली
निरंजना ने बताया कि, मेरे पिताजी जुझार मालवीय की कोर्ट परिसर जावरा मे फोटो कापी की दुकान हैं। वे स्वयं टाइपिंग का कार्य करते है। उन्हें देख कर सच्ची लगन के साथ उनके कार्य में सहयोग किया और वही से न्यायाधीश को आते - जाते देख न्यायाधीश बनने की प्रेरणा मिली और अपने लक्ष्य को साधते हुये सफलता हासिल की। इसके लिए उन्होंने निरंतर प्रतिदिन 10 - 11 घंटे पढाई कर अपना सपना साकार किया।
मेरे पति ने भी मेरा सपना पूरा करने में सहयोग किया
मेरी शादी योगेश मालवी एडवोकेट सोनकच्छ से हुई शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखी मेरे पति ने भी मेरा सपना पूरा करने में सहयोग किया और आज मेरे माता पिता का आशीर्वाद लेने हम पति पत्नी जावरा आये है। कल मुझे ट्रेनिगं पर जबलपुर जाना है।
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होरी हनुमान जी पहुचे ओर भगवान को दिया धन्यवाद।
वही बेटी के सिविल जज बनने की खुशी में माता पिता ने पैदल मिलो लम्बा सफर तय करते हुए होरी हनुमान जी पहुचे ओर भगवान को दिया धन्यवाद।
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