नक्सलियों की पहाड़ी माने जाने वाले दरभंगा के चांदामेटा गांव में अब फोर्स का कब्जा है। यहां पहुंचना पहले किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन अब पहाड़ को चीरकर छिंदगुर तक सड़क बना दी गई है। इसके बाद विकास भी हो रहा है। एक साल पहले एक शेड वाला स्कूल भी खोला गया था वह बंद हो गया था, आंगनवाड़ी भी नहीं थी।
20 से ज्यादा अफसरों को भी ले आए। गांव में जनचौपाल लगाकर लोगों की समस्याओं को सुना
आजादी के बाद पहली बार चादांमेटा में गुरुवार को कलेक्टर रजत बंसल और एसपी जीतेंद्र मीणा पहुंचे। अपने साथ 20 से ज्यादा अफसरों को भी ले आए। गांव में जनचौपाल लगाकर लोगों की समस्याओं को सुना। किसी ने कहा स्कूल नहीं तो किसी ने कहा पेंशन नहीं मिल रही। बारी-बारी से कलेक्टर ने सभी की बातें सुनी और मौके पर ही प्राथमिक शाला स्कूल भवन, आंगनबाड़ी भवन, राशन दुकान बनाने और खोलने की घोषणा हुई। बजट भी सेंक्शन कर दिया और टेंडर निकालने के आदेश जारी कर दिए। कई लोगों को जमीन के पट्टे भी दिए गए।
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कलेक्टर टेबल पर बैठे और सामने गांव के लोग बैठे, दोनों समस्या सुनते और निराकरण करते
शुरुआत में एसपी व कलेक्टर टेबल पर बैठे और सामने गांव के लोग बैठे, दोनों समस्या सुनते और निराकरण करते, इस बीच कुछ बुजुर्ग महिलाएं गौंडी में समस्या बताने लगीं। इसके बाद एसपी और कलेक्टर महिलाओं के पास पहुंचे, कलेक्टर बंसल घुटनों के बल बैठ गए, पीछे एसपी मीणा खड़े रहे। माइक महिलाओं को दिया और एक ट्रांसलेटर भी आ गया। महिलाओं ने बताया कि उन्हें वृद्धा पेंशन नहीं मिल रही। कलेक्टर ने अफसरों से पूछा तो पता चला कि आधार कार्ड, राशन कार्ड ही नहीं बना है। कलेक्टर ने अफसरों से कहा कि सभी को गाड़ी में दरभा ले जाएं और तुरंत पेंशन शुरु की जाए।
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