हनी ट्रैप का रैकेट चलाने वाली युवती द्वारा दर्ज करवाई गई एफआईआर को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता युवती तथा उसके साथियों के खिलाफ ब्लैकमेल करने की एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने कानपुर, जालौन तथा भोपाल में भी अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। महोबा में एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर की शिकायत वापस लेने के लिए साढ़े तीन लाख रुपये लिए थे। याचिका की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने एफआईआर निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।
छतरपुर निवासी कुलदीप दुबे तथा रमजान की तरफ से सिविल लाइन थाने में धारा 376 तथा 120 बी के तहत दर्ज एफआईआर निरस्त किए जाने की मांग करते हुए उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि शिकायतकर्ता सीमा उर्फ साधना राजपूत ने जेएमएफसी छतरपुर के समक्ष आवेदन दायर किया था। सीमा महोबा निवासी युवती झांसी के कॉलेज में पढ़ाई करती थी। इस दौरान उसकी कुलदीप से व्हाट्सएप के माध्यम से दोस्ती हो गई, और निकटता बढती गई एक दिन कुलदीप और उसका दोस्त घर लेके आया। घर में कुलदीप ने शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ यौन संबंध स्थापित किए। उसका दोस्त दूसरे कमरे में बैठा हुआ था। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने उनके खिलाफ फरवरी 2022 में प्रकरण दर्ज किया था।
हनी ट्रैप चलाकर लोगों को फंसाने वाली महिला की एफआईआर हाईकोर्ट ने कैसिंल कर दी है। उसने याचिकाकर्ता पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था और ब्लैकमेल कर रही थी।
Comments (0)