एमपी में इस साल विधानसभा चुनाव होने है। चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में कर्मचारियों ने फिर मोर्चा खोला है। जुलाई से कर्मचारियों ने बड़े आंदोलन की शुरुआत करने की रणनीति बनाई है। पुरानी पेंशन स्कीम, डीए समेत अन्य मुद्दे उठाए जाएंगे। पेंशनर्स की समस्याओं और मांगों को भी उठाया जाएगा। मध्यप्रदेश अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने तीन चरण में आंदोलन करने का ऐलान किया है।
कई मांगें ऐसी हैं, जो सालों से लंबित
जैसे- जैसे चुनाव पास आ रहा है, आंदोलनकारियों की मांगे भी तेज हो गई हैं। मोर्चा के पदाधिकारियों ने सरकार पर अधिकारी, कर्मचारी एवं पेंशनरों की लंबित मांगों के प्रति उदासीनता का आरोप भी लगाया है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि कई मांगें ऐसी हैं, जो सालों से लंबित है। बावजूद सरकार उन पर ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते जुलाई से तीन चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेश के 50 से ज्यादा कर्मचारी संगठन आंदोलन में शामिल होंगे। इसे लेकर बैठक भी हो चुकी है।
इन मांगो को लेकर कर रहे आंदोलन
1- अधिकारी-कर्मचारी और पेंशनर्स को महंगाई भत्ता नहीं।
2- महंगाई भत्ता का देय तिथि से एरियर का भुगतान नहीं किया गया।
3- साल 2016 से पदोन्नति रूकी हुई है। इसके लिए प्रदेश सरकार कोई रूचि नहीं ले रही है। जिसके कारण हजारों अधिकारी एवं कर्मचारी पदोन्नति की बांट देखते-देखते सेवानिर्वत होते जा रहे हैं।
4- स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू नहीं किया जा रहा है।
5- आवास भत्ते की दरों को नहीं बढ़ाया जा रहा है।
6- अनेक संवर्गों में वेतन विसंगति व्याप्त है। लिपिकों की वेतन विसंगतियां दूर नहीं की जा रही है।
7- एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
8- अध्यापकों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता दी जाए।
9- निगम मंडलों में छठवां एवं पंचायत सचिवों को सातवां वेतनमान अभी तक नहीं दिया गया है। यह जल्द मिलें।
10- अनुकंपा नियुक्ति में सरलीकरण नहीं किए जाने के कारण हजारों आश्रित परिवार कार्यालयों के चक्कर लगाते भटक रहे हैं। यह प्रक्रिया ठीक की जाए।
11- नियमित शिक्षको का पदनाम परिवर्तन नहीं हो पाया है।
12- दैनिक वेतन भोगी, संविदा कर्मचारी, स्थाई कर्मी, कोटवार, आउटसोर्सिंग कर्मचारी को नियमित नहीं किया जाए।
आशा एवं उषा कार्यकर्ता, जन स्वास्थ्य रक्षक की मांगों का निराकरण हो।
तीन चरणों में होगा आंदोलन
11 जुलाई को प्रदेश के सभी जिलों में रैली निकालकर मुख्यमंत्री-मुख्य सचिव के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। 11 अगस्त को प्रदेश के सभी कार्यालयों में सामूहिक अवकाश पर अधिकारी-कर्मचारी रहेंगे। दस सितंबर तक मांगें नहीं मानी जाती है तो भोपाल में प्रदेशव्यापी धरना देंगे। साथ ही अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा की जाएगी।
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