हम आपको तंत्र के उन गणों से रूबरू करा रहे हैं, जो अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी बखूबी जानते हैं. क्योंकि, संविधान में न सिर्फ अधिकारों का जिक्र है, बल्कि कर्तव्य भी बताए गए हैं. खंडवा में एक ऐसा युवा है जो कहीं भी तिरंगे का अपमान होते नहीं देख सकता. वहीं, एक शख्स ऐसा भी है, जो आजीविका के लिए छोटी सी दुकान में कपड़े प्रेस करता है. लेकिन, जब तिरंगा सामने आता है तो उसका दिल बड़ा हो जाता है
जज्बा ए हिन्द
कहानी खंडवा के सुशील राठवे और आशीष की है. सुशील राठवे खंडवा जिला अस्पताल के पास छोटी सी दुकान लगाते हैं. इस दुकान में वे लोगों के कपड़े प्रेस करते हैं. यही इनकी आजीविका का मुख्य साधन है. लेकिन, राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त, 26 जनवरी पर जब इनके पास तिरंगा प्रेस के लिए आता है तो ये उसे प्रेस करने के रुपये नहीं लेते. वे 22 साल से तिरंगा प्रेस करने का पैसा नहीं ले रहे. इनका कहना है कि जब सीमा पर तैनात सैनिक हमारे लिए शहीद तक हो जाते हैं तो क्या हम देश के लिए इतना नहीं कर सकते. बात सिर्फ रुपयों की नहीं, मन की भावनाओं की है.
इस तरह सेवा करते हैं आशीष
इसी तरह आशीष शुक्ला भी तिरंगे का ख्याल रखते हैं. वे अब तक कई ऐसे ध्वज बदलवा चुके हैं, जिनका रंग फीका है. ये उन ध्वजों को भी बदलवा चुके हैं जो फट गए हैं. आशीष नगर निगम, रेलवे स्टेशन, स्कूल, पुलिस थाना तक के ध्वज तक को बदलवा चुके हैं. इतना ही नहीं , जिला न्यायालय के तिरंगा ध्वज के फीके पड़ते रंग पर ध्यान आकर्षित कराकर वहां का ध्वज भी बदलवा चुके हैं
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